अफीम नीति के विरोध में किसान उतरे सड़कों पर, मॉर्फिन की मात्रा 3.7 प्रतिशत करने की मांग

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अफीम नीति के विरोध में किसान उतरे सड़कों पर, मॉर्फिन की मात्रा 3.7 प्रतिशत करने की मांग


अफीम नीति के विरोध में किसान उतरे सड़कों पर, मॉर्फिन की मात्रा 3.7 प्रतिशत करने की मांग




नीमच, 30 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्र सरकार की अफीम नीति 2026-27 के विरोध में अफीम उत्पादक किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। नई नीति के प्रावधानों, मॉर्फिन की निर्धारित मात्रा और पुराने चीरे वाले पट्टों को सीपीएस श्रेणी में परिवर्तित किए जाने के विरोध में शुक्रवार को मध्य प्रदेश के मालवा-मेवाड़ अंचल के किसानों ने नीमच में जोरदार प्रदर्शन किया। नीमच, मंदसौर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के सैकड़ों किसान, किसान नेता श्यामलाल जोकचंद के नेतृत्व में एकत्रित हुए। किसानों ने अंबेडकर चौराहे से रैली निकालकर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के उपायुक्त कार्यालय का घेराव किया और धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अफीम नीति में संशोधन की मांग उठाई। इसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम उपायुक्त नारकोटिक्स के माध्यम से छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। किसानों का कहना था कि नई नीति के प्रावधानों से परंपरागत रूप से चीरा लगाकर अफीम उत्पादन करने वाले किसानों के सामने कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। विशेष रूप से मॉर्फिन की निर्धारित मात्रा बढ़ाने और पुराने चीरे वाले पट्टों को सीपीएस श्रेणी में बदलने के फैसले से किसानों में असंतोष है।

मॉर्फिन की मात्रा 3.7 प्रतिशत करने की मांग

किसानों ने अफीम में अनिवार्य मॉर्फिन की मात्रा 4.2 और 4.4 प्रतिशत निर्धारित किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इन मानकों के कारण पुराने चीरे वाले कई पट्टे प्रभावित हुए हैं और किसानों की पात्रता पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने मांग की कि क्षेत्र की परिस्थितियों और वास्तविक समस्याओं को देखते हुए मॉर्फिन की निर्धारित मात्रा घटाकर 3.7 प्रतिशत की जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र किसानों को राहत मिल सके।

5 के बजाय 10 आरी के चीरा पट्टे दिए जाएं

ज्ञापन में किसानों ने 5 आरी के स्थान पर 10 आरी के चीरा पट्टे देने की मांग भी की। उनका कहना था कि जिन किसानों ने प्रतिवर्ष 90 किलोग्राम या इससे अधिक औसत डोडा उत्पादन दिया है, उन्हें भी केवल 5 आरी के पट्टे दिए जा रहे हैं। ऐसे किसानों को उनकी उत्पादन क्षमता और पिछले वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर 10 आरी के चीरा पट्टे दिए जाने चाहिए। इसके साथ ही सीपीएस व्यवस्था में भी पात्रता के अनुरूप विस्तार करने की मांग की गई।

1997-98 से बंद पट्टे बहाल करने की मांग

किसानों ने वर्ष 1997-98 से अब तक विभिन्न कारणों से बंद, निरस्त अथवा लंबित पड़े अफीम पट्टों की समीक्षा कर पात्र किसानों के लाइसेंस दोबारा बहाल करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि कई किसान वर्षों से अफीम की खेती करते रहे हैं, लेकिन विभिन्न कारणों से उन्हें पट्टे नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे मामलों में सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। साथ ही नए पात्र किसानों को अफीम की खेती से जोड़ने के लिए नए लाइसेंस जारी किए जाएं।

सरकारी खरीद मूल्य एक लाख रुपये प्रति किलो करने की मांग

अफीम की खेती में लगातार बढ़ती लागत का मुद्दा उठाते हुए किसानों ने सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग की। किसानों के अनुसार खाद, दवाइयों, कृषि उपकरणों, बिजली, सिंचाई और मजदूरी सहित खेती से जुड़े सभी खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में सरकारी खरीद मूल्य किसानों की बढ़ती लागत के अनुरूप होना चाहिए, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिल सके।

डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट के कठोर प्रावधानों से बाहर रखने की मांग

किसानों ने डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 एवं 8/29 के कठोर प्रावधानों के दायरे से बाहर करने की मांग भी उठाई। उनका दावा है कि डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.02 प्रतिशत से भी कम होती है, इसके बावजूद इससे जुड़े मामलों में किसानों को गंभीर कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किसानों ने संबंधित कानूनी प्रावधानों की समीक्षा कर डोडाचूरा के संबंध में स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था बनाने की मांग की, ताकि अफीम उत्पादकों को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से राहत मिल सके।

प्राकृतिक आपदा से खराब फसल के मामलों में पट्टे बहाल हों

ज्ञापन में ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से अफीम की फसल खराब होने के मामलों को भी उठाया गया। किसानों ने बताया कि कई बार प्राकृतिक आपदा के कारण फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है। किसानों ने ऐसे मामलों की दोबारा जांच कराने और विभागीय निर्देशों के अनुसार खराब फसल नष्ट कराने वाले किसानों के पट्टे फिर से चीरा लगाने वाली श्रेणी में बहाल करने की मांग की।

मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा व्यापक

किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने कहा कि अफीम उत्पादक किसान लंबे समय से अपनी जायज समस्याओं को लेकर सरकार और संबंधित विभागों के सामने मांगें रख रहे हैं, लेकिन अब तक उनका स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

उन्होंने सरकार से अफीम नीति 2026-27 में आवश्यक संशोधन कर किसानों की छह सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

Livevns.news Desk
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