हरदा में किसान क्रांति आंदोलन तेज, 270 गांवों से बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ मंडी पहुंचे किसान
- एमएसपी सहित 16 मांगों पर अड़े किसान
इंदौर, 28 अप्रैल (हि.स.) । मध्य प्रदेश के हरदा जिले में भीषण गर्मी के बीच किसानों ने 16 सूत्रीय मांगों को लेकर ‘घेरा डालो डेरा डालो किसान क्रांति आंदोलन’ मंगलवार से शुरू कर दिया है। आंदोलन में हरदा, देवास, नर्मदापुरम और खंडवा जिलों के करीब 270 गांवों के किसान बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ कृषि मंडी में पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि लगभग 5000 ट्रैक्टरों से किसानों का जुटान हो रहा है।
पानी और राशन के साथ पहुंचे किसान
हंडिया तहसील से आए 100 से अधिक किसानों ने बताया कि वे पूरी तैयारी के साथ आंदोलन में शामिल हुए हैं। किसान ईश्वर विस्नोई ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि वे एक महीने तक आंदोलन चलाने की तैयारी के साथ आए हैं और अपने साथ गैस-चूल्हा, पानी की केन और जरूरी सामान लेकर आए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी बात नहीं सुनेगा, वे वहीं डटे रहेंगे और अन्य किसानों को भी सहयोग देंगे। वहीं, स्थिति को देखते हुए कलेक्ट्रेट और मंडी क्षेत्र को पूरी तरह छावनी में बदल दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 5 बटालियनों के करीब 1100 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
एमएसपी पर अड़े किसान
आंदोलन में शामिल स्वतंत्र किसान विचारक मनोज ने कहा कि यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक और शुद्ध किसान आंदोलन है। उनके अनुसार सरकार ने स्टॉल व्यवस्था तो शुरू की है, लेकिन स्लॉट बुकिंग की समस्या के कारण किसान अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। किसानों की मुख्य मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) है। उनका आरोप है कि मक्का का एमएसपी 2400 रुपये होने के बावजूद बाजार में इसे 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा जा रहा है। इसके अलावा किसानों की मांग है कि मूंग की खरीदी भी एमएसपी पर हो।
ट्रॉलियों में टेंट, लंबे आंदोलन की चेतावनी
किसान नेता सुनील गोल्या ने बताया कि आंदोलन मंगलवार सुबह 11 बजे से शुरू हुआ है। किसान अपने साथ आटा, दाल और अन्य खाद्य सामग्री लेकर आए हैं और ट्रॉलियों में ही भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। वहीं, किसान नेता नानकराम बेनीवाल और राजेंद्र पटेल ने चेतावनी दी है कि किसानों ने अपनी ट्रॉलियों को अस्थायी तंबू में बदल लिया है और वे बिस्तर भी साथ लाए हैं। यदि प्रशासन उनकी मांगों पर सहमत नहीं होता, तो यह आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रह सकता है। हरदा की कृषि उपज मंडी में करीब 2000 से अधिक किसान मौजूद हैं। ट्रैक्टरों के आने का सिलसिला जारी है।
हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

