रबी फसल पंजीयन में तकनीकी बाधा, किसान दिनभर लाइनों में खड़े; अंतिम तिथि बढ़ाने के बाद भी परेशानी बरकरार

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रबी फसल पंजीयन में तकनीकी बाधा, किसान दिनभर लाइनों में खड़े; अंतिम तिथि बढ़ाने के बाद भी परेशानी बरकरार


रबी फसल पंजीयन में तकनीकी बाधा, किसान दिनभर लाइनों में खड़े; अंतिम तिथि बढ़ाने के बाद भी परेशानी बरकरार


हरदा 08 मार्च (हि.स.)।रबी फसल की समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया इन दिनों गंभीर तकनीकी समस्याओं के कारण धीमी गति से चल रही है। मप्र के हरदा से सामने आई समस्‍या में पाया गया है कि पंजीयन के लिए निर्धारित वेबसाइट ठीक से काम नहीं कर रही है, जिसके चलते किसान सुबह से शाम तक केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहने के बावजूद अपना पंजीयन नहीं करा पा रहे हैं। स्थिति इतनी खराब है कि एक दिन में मुश्किल से पांच से 10 किसानों का ही पंजीयन हो पा रहा है।

प्रारंभ में पंजीयन की अंतिम तिथि सात मार्च निर्धारित की गई थी, लेकिन आधे से अधिक किसानों के पंजीयन शेष रहने के कारण इसे बढ़ाकर 10 मार्च कर दिया गया। हालांकि किसानों का कहना है कि जब साइट ही सही तरीके से काम नहीं कर रही है, तो तिथि बढ़ाने का भी कोई खास फायदा नहीं हो रहा। पंजीयन केंद्रों पर आने वाले किसान दिनभर इंतजार करते हैं, लेकिन कई बार शाम तक भी उनका नंबर नहीं आ पाता।

किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन अनिवार्य है, इसलिए वे लगातार केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। कई किसान सुबह जल्दी पहुंचकर लाइन में लग जाते हैं, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण दिनभर में केवल 4-5 किसानों का ही पंजीयन हो पाता है। इससे बड़ी संख्या में किसान अभी भी पंजीयन से वंचित हैं और उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं वे समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने से वंचित न रह जाएं।

किसानों का यह भी कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह पिछले वर्ष के पंजीयन के आंकड़ों से तुलना कर वर्तमान स्थिति का आकलन करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस बार कितने किसानों का पंजीयन बाकी है। किसानों की परेशानी को देखते हुए पंजीयन प्रक्रिया को सहज और सरल बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई ठोस प्रयास दिखाई नहीं दे रहा।

पंजीयन केंद्रों पर मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और ऑपरेटर तकनीकी समस्या का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। किसान दिनभर लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन साइट नहीं चलने के कारण उनका काम नहीं हो पाता। ऐसे में अंतिम तिथि नजदीक आने से किसानों की चिंता और बढ़ती जा रही है।

इस मुद्दे पर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के पूर्व जिलाध्यक्ष रामनिवास खोरे ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि पंजीयन की प्रक्रिया के जरिए किसानों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही हो। उनका आरोप है कि इस बार सरकार का इरादा समर्थन मूल्य पर सभी किसानों का गेहूं खरीदने का नहीं है। उन्होंने कहा कि जब एक दिन में केवल 4-5 किसानों का ही पंजीयन हो पा रहा है, तो बड़ी संख्या में किसान पंजीयन से वंचित रह जाएंगे और समर्थन मूल्य पर फसल बेचने का लाभ नहीं ले पाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि वेबसाइट की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो तिथि बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। यह समस्या केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशभर में पंजीयन प्रक्रिया कछुआ गति से चल रही है। इसके बावजूद समस्या के समाधान के लिए ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

इस संबंध में सहायक आयुक्त, सहकारिता विभाग हरदा वासुदेव भदोरिया का रविवार को कहना था कि पंजीयन प्रक्रिया में तकनीकी समस्या आ रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सोमवार से पंजीयन कार्यवाही सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन कराया जाए। फिलहाल किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही तकनीकी समस्या दूर होगी और उन्हें राहत मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Pramod Somani

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