उद्यानिकी का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें : बर्णवाल

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उद्यानिकी का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें : बर्णवाल


उद्यानिकी का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें : बर्णवाल


- कृषि उत्पादन आयुक्त ने इंदौर में की संभागीय समीक्षा

इंदौर, 08 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने सोमवार को इंदौर में रबी 2025-26 की समीक्षा एवं खरीफ- 2026 की तैयारी के लिए इंदौर संभाग की संभागीय समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

बैठक में कृषि विभाग के सचिव निशांत वरवड़े, सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव डीपी आहूजा, उद्यानिकी विभाग के सचिव जान किंग्स ली, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा, उद्यानिकी संचालक अरविंद दुबे सहित संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उपायुक्त (राजस्व) श्रीमती सपना लोवंशी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त बर्णवाल ने कृषि, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता एवं अन्य संबंधित संस्थाओं की योजनाओं, कार्यक्रमों और उपलब्धियों के संबंध में समीक्षा की। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर्स ने अपने-अपने जिलों में कृषि क्षेत्र में किये जा रहे नवाचारों के बारें में बताया।

बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे योजना बनाकर निर्धारित समय-सीमा में लक्ष्य पूर्ति करें। अधिकारी मैदानी स्तर पर जाकर भौतिक सत्यापन के साथ इसकी मॉनिटरिंग भी करें। राज्य शासन की समस्त योजनाओं का लाभ हितग्राही किसानों को मिले और कोई भी इससे वंचित नहीं रहें। सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। किसानों के द्वारा उत्पादित फसल का भुगतान समय सीमा में सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि अधिकारी किसानों से आग्रह करें कि उद्यानिकी में अपार संभावनाएं हैं, किसानों के बीच जाकर उद्यानिकी का रकबा अधिक बढ़ाने के लिये उन्हें प्रोत्साहित करें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार कम मूल्य की फसलों के बजाय अधिक मूल्य वाली फसलों का उत्पादन अधिक करें।

उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकों का प्रयोग करें और नवाचार को अधिक से अधिक बढ़ावा दें। अधिकारी किसानों को फसल उत्पादन के लिए समय पर बीज, उर्वरक आदि उपलब्ध करायें। खेतों में बीटी कॉटन के साथ अन्य कपास की प्रजातियों का भी उत्पादन करें, जिससे कीटों की समस्या कम होगी। सोयाबीन फसल के विकल्प के रूप में अरहर पूसा-16 को लगाकर उत्पादन बढ़ाया जायें। फसल उत्पादन के लिए किसान डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में जैविक खाद का इस्तेमाल करें। किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए मिट्टी परीक्षण करने के लिए प्रेरित करें। बेहतर मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला बनायें। किसानों की सुविधा के लिए सभी जिलों में खाद वितरण केन्द्र बनायें जायें। किसानों की सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए भण्डारण केन्द्र पर पर्याप्त विश्राम शेड की व्यवस्था की जायें।

उन्होंने कहा कि संभाग में कोई भी किसान नरवाई (फसल अवशेष) नहीं जलायें, इससे पर्यावरण को नुकसान होता है। नरवाई जलाने वाले किसानों के विरूद्ध पंचनामे और अर्थदण्ड की कार्रवाई में तेजी लायें। ई-मण्डी में भुगतान प्राप्त करने वाले किसानों को अधिक समय लग रहा है, उस पर ध्यान दिया जायें। यह प्रयास करें कि किसानों को ई-मण्डी में अपने भुगतान के लिए अधिक समय नहीं लगें। बर्णवाल ने कहा कि संभाग के सभी कलेक्टर्स, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं संबंधित अधिकारी एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत संभाग में अधिक से अधिक पौधारोपण करायें।

प्रमुख सचिव आहूजा ने कहा कि किसानों को शून्य प्रतिशत पर ऋण उपलब्ध कराने के कार्य में तेजी लायें। पैक्स सदस्यता अभियान में तेजी लायें और शिविर लगाकर लक्ष्य को पूरा करें। सहकारिता बैंक अधिकारी कृषि ऋण वसूली में तेजी लायें।

कृषि सचिव निशांत वरवड़े ने कहा कि अधिकारी अमानक उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक विक्रय करने वालों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई करें। ऐसे विक्रताओं के खिलाफ पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करायें। उन्होंने कहा कि जो हितग्राही उर्वरक भण्डारों से आवश्यकता से अधिक उर्वरक प्राप्त कर रहा है, अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि उर्वरक का इस्तेमाल खेती के लिए ही किया जा रहा है या नहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लक्ष्य को सुनिश्चित करने के लिये तहसील स्तर पर शिविर आयोजित किये जाये।

संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने कहा कि संभाग में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। किसानों की फार्मल रजिस्ट्री बनाने के कार्य में तेजी लायी जा रही है।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि इंदौर जिले में नरवाई जलाने की रोकथाम के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया गया। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन हेतु वैकल्पिक संसाधन एवं व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे उन्हें नरवाई जलाने के बजाय पर्यावरण अनुकूल उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी एवं जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से किसानों को पर्यावरण संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य के महत्व से भी अवगत कराया जा रहा है। कलेक्टर ने बताया कि इंदौर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ढक्कनवाला कुआं स्थित ग्रामीण हाट बाजार में सप्ताह में दो दिन प्राकृतिक उत्पादों (फल एवं सब्जियों) का विक्रय किया जाता है। इन उत्पादों को बेहतर प्रतिशाद मिल रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों को भी यहां अवलोकन के लिए आमंत्रित किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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