लोकतंत्र की रक्षा युवाओं का दायित्व : कैलाश सोनी ने ‘विकसित भारत युवा संसद’ में दिलाई आपातकाल की याद
नरसिंहपुर, 28 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में आयोजित ‘विकसित भारत युवा संसद 2026’ के जिला स्तरीय मंच से पूर्व राज्यसभा सांसद एवं लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी ने युवाओं को लोकतंत्र की मूल भावना समझाते हुए एक सशक्त संदेश दिया, उन्होने कहा कि “लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जन-जन की जिम्मेदारी है।”
सोनी ने 25 जून 1975 के आपातकाल का स्मरण कराते हुए कहा कि इतिहास का वह दौर हमें संवैधानिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने की सीख देता है। यह आयोजन स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘माय भारत’ एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में भव्य रूप से गत दिवस संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिले भर से आए युवाओं ने संसदीय प्रक्रिया की कार्यशैली को व्यवहारिक रूप में समझा और राष्ट्र के लोकतांत्रिक भविष्य पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।
अपने उद्बोधन में कैलाश सोनी ने कहा, “आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व लागू हुआ आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का वह अध्याय है, जो हमें यह याद दिलाता है कि जब नागरिक अधिकारों पर अंकुश लगता है, तब लोकतंत्र कमजोर पड़ता है।” उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि प्रेस की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की स्वायत्तता लोकतंत्र के दो ऐसे स्तंभ हैं, जिनकी मजबूती से ही देश की संवैधानिक व्यवस्था सुरक्षित रहती है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल दर्शक बनकर नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार बनकर लोकतंत्र को मजबूत करना होगा। “मतदान, जागरूकता, संवाद और संवैधानिक कर्तव्यों का पालन ये सभी लोकतंत्र की रक्षा के प्रभावी साधन हैं,” उन्होंने जोर देकर कहा। उनके भाषण के दौरान सभागार में मौजूद छात्र-छात्राएं बार-बार तालियों से उनका समर्थन करते नजर आए।
उल्लेखनीय है कि इस जिला स्तरीय युवा संसद प्रतियोगिता के लिए ‘माय भारत’ पोर्टल के माध्यम से कुल 75 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया था। प्रारंभिक चयन प्रक्रिया के बाद कड़े मुकाबले में 5 श्रेष्ठ वक्ताओं का चयन किया गया, जो आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में नरसिंहपुर जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रतिभागियों ने संसद की कार्यवाही का जीवंत प्रदर्शन करते हुए प्रश्नकाल, चर्चा और प्रस्तावों के माध्यम से अपनी तार्किक क्षमता और नेतृत्व कौशल का परिचय दिया।
कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. सतीश दुबे ने भारतीय संविधान की धारा 352 और 1975 के आपातकाल के दौरान लागू ‘मीसा’ (MISA) कानून के प्रभाव पर तकनीकी प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि संविधान में आपातकालीन प्रावधान क्यों जोड़े गए और उनका दुरुपयोग किस प्रकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित कर सकता है। विशिष्ट अतिथि महंत प्रीतमपुरी जी ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए छात्र संघ चुनावों की महत्ता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक नेतृत्व की शुरुआत शैक्षणिक संस्थानों से ही होती है और युवाओं को स्वस्थ बहस और वैचारिक विविधता को अपनाना चाहिए। वरिष्ठ समाजसेवी इंजी. सुनील कोठारी ने विद्यार्थियों से मुख्य अतिथि के अनुभवों से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार नारायण श्रीवास्तव ने कैलाश सोनी के साथ बिताए अपने युवावस्था के संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था से ही सोनी एक प्रखर वक्ता और सिद्धांतों पर अडिग व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते रहे हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.बी. सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को न केवल अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं। उन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन शिल्पी तिवारी ने किया। आयोजन की सफलता में नोडल अधिकारी गजेंद्र कुमार सिंह (सहायक प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान) और एनएसएस प्रभारी डॉ. अमित ताम्रकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
हिन्दुस्थान समाचार/भागीरथ तिवारी
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

