अनूपपुर: हाथियों का कहर जारी, 5 किसानों की फसलों का पहुंचाया नुकसान, 20 खंभों के साथ फेंसिंग दीवार तोड़ी

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अनूपपुर: हाथियों का कहर जारी, 5 किसानों की फसलों का पहुंचाया नुकसान, 20 खंभों के साथ फेंसिंग दीवार तोड़ी


अनूपपुर: हाथियों का कहर जारी, 5 किसानों की फसलों का पहुंचाया नुकसान, 20 खंभों के साथ फेंसिंग दीवार तोड़ी


अनूपपुर, 22 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल से दो माह पूर्व आए तीन हाथियों के दल ने अनूपपुर के जैतहरी वन परिक्षेत्र के धनगवां बीट में शनिवार-रविवार की रात हाथियों ने वन विभाग की कैम्पा रोपण क्षेत्र की लगभग 60 मीटर लंबी फेंसिंग दीवार और 20 खंभों को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने आसपास के खेतों में घुसकर गेहूं, मटर और मूंगफली की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।

हाथियों की निगरानी एवं गतिविधि को देखने के लिए वाइल्ड लाइफ स्टूटेनट आंफ इन्डिया पश्चिम बंगाल के हाथी विशेषज्ञों का एक दल ने विगत दिनों हाथियों के स्वभाव का निरीक्षण कर आगे की रणनीति बनाए जाने की बात कहीं। कई दिनों से तीनों हाथी एक एवं दो की संख्या में अलग-अलग होकर धनगवां बीट के जंगल में डेरा जमाये हुए हैं।

वन विभाग के अनुसार, हाथियों ने पांच किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इनमें ग्राम चोई के नत्थू राठौर, प्रेमलाल और बाबूराम सिंह की गेहूं की खड़ी फसलें बर्बाद हुई हैं। कुकुरगोडा के रामप्रसाद की गेहूं और मटर की फसलें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहीं चोई के कन्हैया राठौर की मूंगफली, प्याज और आलू की बाड़ी को भी हाथियों ने रौंद दिया।

दो हिस्सों में बंटा हाथियों का दल, दहशत

वर्तमान में, हाथियों का यह दल दो हिस्सों में बंट गया है। एक हाथी तुर्का डोंगरी (RF 337) में विचरण कर रहा है, जबकि दो अन्य हाथी चिमटहाई डोंगरी के घने जंगलों में छिपे हुए हैं। हाथियों की मौजूदगी से नजदीकी ग्राम कुसुम्हाई, पचौहा, लहरपुर, चोई और कुकुरगोडा के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

हाथियों पर नजर, ग्रामीणों को सतर्कता सलाह

परिसर रक्षक कोमल सिंह मरावी ने बताया कि हाथियों की लगातार निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल की ओर न जाने की सलाह दी गई है। जैतहरी वन अमला मौके पर तैनात है और हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। विभाग ने मुनादी कराकर ग्रामीणों को हिदायत दी है कि वे जलाऊ लकड़ी लेने या मवेशी चराने जंगल की ओर कतई न जाएं। साथ ही, रात के समय खेतों की रखवाली करने से बचें और जंगल की पगडंडियों का इस्तेमाल आवाजाही के लिए न करें। हाथियों के वापस छत्तीसगढ़ के मरवाही या चोलना की ओर जाने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए वन विभाग हाई अलर्ट पर है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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