37 दिन बाद फिर अनूपपुर लौटे हाथी: जैतहरी में मचाया उत्पात, 25 किलोमीटर का सफर तय कर गोबरी जंगल पहुंचे, ग्रामीणों में दहशत

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37 दिन बाद फिर अनूपपुर लौटे हाथी: जैतहरी में मचाया उत्पात, 25 किलोमीटर का सफर तय कर गोबरी जंगल पहुंचे, ग्रामीणों में दहशत


37 दिन बाद फिर अनूपपुर लौटे हाथी: जैतहरी में मचाया उत्पात, 25 किलोमीटर का सफर तय कर गोबरी जंगल पहुंचे, ग्रामीणों में दहशत


अनूपपुर, 26 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी वन परिक्षेत्र में छत्तीसगढ़ से लौटे चार जंगली हाथियों के दल ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पात मचाकर दहशत फैला दी है। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात हाथियों का यह समूह लगभग 25 किलोमीटर का लंबा सफर तय करते हुए कई गांवों से होकर गोबरी बीट के जंगल तक पहुंचा। इस दौरान हाथियों ने खेतों में खड़ी फसलों को रौंद दिया, कई किसानों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर लोगों की नींद उड़ा दी। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह दल करीब 37 दिनों तक छत्तीसगढ़ के जंगलों में विचरण करने के बाद 24-25 जून की रात फिर से मध्य प्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ। वन विभाग के अनुसार हाथियों ने जैतहरी क्षेत्र की वन बीट चोलना के गूजरनाला को पार करते हुए बचहाटोला, छातापटपर, पड़रिया और चोई के रास्ते आगे बढ़ना शुरू किया। गुरुवार की देर शाम यह दल ग्राम पंचायत क्योटार के पटौराटोला और कुसमहाई पहुंचा, जहां से टकहुली और लहरपुर होते हुए नगर परिषद जैतहरी के वार्ड क्रमांक-1 में प्रवेश कर गया।

रात के अंधेरे में हाथियों ने अनूपपुर-जैतहरी-वेंकटनगर मुख्य मार्ग पार किया और जैतहरी बस स्टैंड से गुजरते हुए रेलवे लाइन को भी पार कर लिया। इसके बाद शुक्रवार सुबह तिपान नदी पार करते हुए यह दल गोबरी बीट के झुरहीतलैया जंगल में पहुंच गया, जहां दिनभर विश्राम करता रहा। वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।

इस दौरान हाथियों ने टकहुली गांव में एक किसान के घर में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया। खेतों और बाड़ी में लगी फसलों को भी बुरी तरह रौंद दिया। वहीं एक अन्य किसान की बाड़ी की बाउंड्रीवॉल भी हाथियों ने गिरा दी। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के अचानक गांव में पहुंचने से लोग पूरी रात दहशत में रहे और परिवारों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली।

हाथियों का दल जब जैतहरी नगर के बस स्टैंड क्षेत्र से होकर गुजरा तो पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। देर रात हाथियों के आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचने की सूचना मिलते ही वन विभाग की निगरानी टीम और स्थानीय ग्रामीण सक्रिय हो गए। लोगों ने पटाखे फोड़कर और शोर मचाकर हाथियों को आबादी से दूर जंगल की ओर मोड़ने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद हाथियों का दल तिपान नदी की ओर बढ़ा और गोबरी जंगल में प्रवेश कर गया।

वन परिक्षेत्राधिकारी विवेक मिश्रा ने बताया कि मध्य रात्रि के समय हाथियों का समूह रेलवे लाइन पार कर वार्ड क्रमांक-4 के बंजारी टोला क्षेत्र तक पहुंच गया था। इसके बाद दल तिपान नदी पार कर सुरक्षित रूप से गोबरी जंगल की ओर बढ़ गया। उन्होंने बताया कि हाथियों के आवागमन पर लगातार नजर रखी जा रही है और गश्ती दल चौबीसों घंटे सक्रिय है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह वही पारंपरिक मार्ग है जिसका उपयोग हाथियों का दल पहले भी करता रहा है। धनगवां जंगल से निकलकर पटौराटोला, टकहुली, लहरपुर, जैतहरी बस स्टैंड और वार्ड क्रमांक-15 होते हुए तिपान नदी पार कर गोबरी जंगल तक पहुंचने का यह रास्ता हाथियों के लिए परिचित बन चुका है। यही कारण है कि हर बार यह समूह इसी मार्ग से आवाजाही करता है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी यह हाथियों का दल अनूपपुर जिले के जैतहरी, अनूपपुर, राजेंद्रग्राम और अहिरगवां क्षेत्रों के अलावा शहडोल जिले के बुढार तथा डिंडोरी जिले के कई इलाकों में लगातार 146 दिनों तक विचरण करता रहा था। इसके बाद हाथी 37 दिनों के लिए छत्तीसगढ़ के जंगलों में चले गए थे, लेकिन अब एक बार फिर उनकी वापसी ने सीमावर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। विभाग ने जंगल से लगे गांवों के लोगों को रात के समय अकेले बाहर नहीं निकलने, हाथियों के झुंड के पास जाने से बचने और सुरक्षित पक्के मकानों में रहने की सलाह दी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति हाथियों को उकसाने, परेशान करने या उनके साथ छेड़छाड़ करते हुए पाया गया अथवा ऐसा कोई वीडियो सामने आया तो उसके विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जैतहरी क्षेत्र पहले भी हाथियों के हमलों का दर्द झेल चुका है। पूर्व की घटनाओं में हाथियों के हमले से दो लोगों की जान जा चुकी है। यही वजह है कि हाथियों के दोबारा लौटने से पूरे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल है। फिलहाल वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रखते हुए ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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