अनूपपुर: जय अंबे कंपनी के खिलाफ लामबंद हुए जनप्रतिनिधि और किसान, 72 घंटे का अल्टीमेटम
अनूपपुर, 09 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के ग्राम खाड़ा में स्थित रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में संचालित जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बेरोजगार युवाओं ने मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय लोगों ने कंपनी प्रबंधन पर क्षेत्रीय युवाओं की उपेक्षा कर बाहरी लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी गई तो कंपनी के खिलाफ व्यापक आंदोलन किया जाएगा। बुधवार को आयोजित बैठक एवं विरोध प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, किसान और सामाजिक कार्यकर्ता एकजुट दिखाई दिए। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा ने कंपनी प्रबंधन को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि स्थानीय युवाओं के हितों की अनदेखी अब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
भूपेश शर्मा ने कहा कि रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट क्षेत्र के गांवों के लोगों ने वर्षों से विकास और रोजगार की उम्मीद की है। क्षेत्र की जमीन, सड़क, प्राकृतिक संसाधन और स्थानीय वातावरण परियोजनाओं से प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी में बड़ी संख्या में बाहरी कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है, जबकि क्षेत्र के शिक्षित और योग्य बेरोजगार युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देना केवल सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय विकास की आवश्यकता भी है। यदि कंपनी स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देगी तो इसका विरोध और तेज किया जाएगा।
66 कर्मचारियों की सूची तैयार होने का दावा
बैठक के दौरान भूपेश शर्मा ने दावा किया कि कंपनी में कार्यरत बाहरी कर्मचारियों की एक सूची तैयार की गई है, जिसमें लगभग 66 कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन को यह सूची प्रस्तुत की जाएगी और मांग की जाएगी कि स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता देने के लिए इन पदों की समीक्षा की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि जिन पदों पर स्थानीय योग्य युवक उपलब्ध हैं, वहां बाहरी कर्मचारियों की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। आंदोलनकारियों ने कहा कि सीटें खाली कर स्थानीय बेरोजगार युवाओं को अभिलंब भर्ती में प्राथमिकता दी जाए।
हालांकि कर्मचारियों की सूची और नियुक्तियों से संबंधित आरोपों पर कंपनी प्रबंधन की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। आंदोलनकारियों ने मांग की है कि कंपनी प्रबंधन सार्वजनिक रूप से स्थानीय रोजगार नीति स्पष्ट करे और क्षेत्रवार नियुक्त कर्मचारियों की जानकारी उपलब्ध कराए।
72 घंटे में निर्णय नहीं तो आंदोलन होगा तेज
सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा ने कहा कि कंपनी को 72 घंटे का समय दिया गया है। इस अवधि के भीतर यदि स्थानीय बेरोजगार युवाओं की भर्ती और रोजगार संबंधी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह क्षेत्रीय हित और स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए किया जा रहा है। जनप्रतिनिधि, किसान और सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर एकजुट हैं। आवश्यकता पड़ने पर कंपनी के कार्यालय और परियोजना क्षेत्र के सामने शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि स्थानीय हितों की लगातार अनदेखी की गई तो कंपनी का काम प्रभावित करने के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी दायरे में आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि कंपनी को क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला है, इसलिए क्षेत्र के लोगों को रोजगार और सम्मान मिलना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों ने दिया समर्थन
इस आंदोलन में क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने स्थानीय बेरोजगार युवाओं की समस्या को गंभीर बताते हुए एकजुट होकर संघर्ष करने की बात कही।
पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ने कहा कि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार से वंचित रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। कंपनियों को स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसरों में स्थानीय युवाओं को उचित स्थान मिलना चाहिए।
जिला पंचायत सदस्य शांति मनमोहन चौधरी ने कहा कि क्षेत्र की जनता अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो चुकी है। स्थानीय युवाओं के भविष्य के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कंपनी प्रबंधन से तत्काल स्थानीय भर्ती नीति पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।
जनपद सदस्य एवं वन सभापति चंद्रकुमार तिवारी ने कहा कि क्षेत्र के विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी आवश्यक है। यदि उद्योग और कंपनियां स्थानीय संसाधनों का उपयोग करती हैं तो उन्हें स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
पूर्व जनपद सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजबहोर चंद्रा ने कहा कि बेरोजगारी क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। बड़ी परियोजनाओं और कंपनियों के संचालन के बावजूद यदि स्थानीय युवा रोजगार के लिए भटकते रहें तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि स्थानीय बेरोजगारों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। कंपनी प्रबंधन को स्थानीय लोगों की भावनाओं और अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
किसानों और स्थानीय लोगों का भी मिला समर्थन
बैठक में मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने भी स्थानीय रोजगार की मांग का समर्थन किया। ग्रामीणों का कहना था कि परियोजनाओं और औद्योगिक गतिविधियों का सबसे अधिक प्रभाव स्थानीय गांवों पर पड़ता है, इसलिए रोजगार का पहला अधिकार भी प्रभावित क्षेत्र के योग्य युवाओं को मिलना चाहिए। लोगों ने कहा कि रोजगार मिलने से स्थानीय परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और युवाओं को पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने मांग की कि कंपनी तत्काल स्थानीय बेरोजगार युवाओं का सर्वे कर योग्यतानुसार भर्ती प्रक्रिया शुरू करे।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं के रोजगार अधिकार की लड़ाई लड़ना है। उन्होंने कंपनी से बातचीत और समाधान का रास्ता अपनाने की अपील की है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

