अनूपपुर: श्री कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक के पुस्तकालय में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियाँ का डिजिटल संरक्षण

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अनूपपुर: श्री कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक के पुस्तकालय में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियाँ का डिजिटल संरक्षण


अनूपपुर, 22 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की धार्मिक नगरी एवं पर्यटन स्थल अमरकंटक में श्री कल्याण सेवा आश्रम की पुस्तकालय में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियाँ, ताडपत्र व दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण व भावी पीढ़ियों तक इनकी पहुँच बनाने के उद्देश्य से लगभग 166 प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन कर उन्हें भारत ऐप में अपलोड करने का कार्य शुक्रवार से प्रारंभ कर दिया गया है। अभियान के तहत इन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है।

ज्ञात हो कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वे शुरू है। देशभर में राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान 16 मार्च से 15 जून तक संचालित किया जा रहा है। जिसमे जनभागीदारी के माध्यम से देशभर के परिवारों, मंदिरों एवं संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम ऐप के जरिये जिओ टैग कर सूचीबद्ध व डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है। अमरकंटक के कल्याण सेवा आश्रम में इस दौरान मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड से पर्यटन प्रबंधक अजय अग्रवाल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मण्डल से आए जेएसए समरेश आनंद एवं श्री कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक के पुस्तकालय प्रभारी स्वामी सुन्दरानंद पुरी उपस्थित रहे।

मोबाइल ऐप से स्वयं कर सकते हैं अपलोड

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने प्राचीन और अमूल्य पांडुलिपियों को डिजिटल फोर्मेट में कन्वर्ट करने के लिए निःशुल्क प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च की है, जिसके माध्यम से लोग अपने पास सुरक्षित पांडुलिपियों की जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। उन्हें क्यूआर कोड स्कैन कर अपनी पाण्डुलिपि की डिटेल दर्ज करनी होगी। यदि किसी की पाण्डुलिपि की स्थिति ठीक नहीं है तो उसका संरक्षण (प्रिजर्वेशन) भी मंत्रालय की टीम करेगी। चिन्हित पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल रेपोजिटरी में सुरक्षित रखा जाएगा। इस अभियान में पाण्डुलिपि धारकों का स्वामित्व पूर्णतः सुरक्षित रहेगा। ऐप पर 23 भारतीय भाषाओं का विकल्प दिया गया है। इसमें व्यक्ति, संस्था, नागरिक और सर्वेयर जैसी प्रोफाइल चुनकर आवेदन किया जा सकेगा।

75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता

ज्ञान भारतम अभियान के तहत लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस पहल से जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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