झाबुआ में गणेशोत्सव की धूम, शिव-पार्वती की पूजा के साथ देर रात तक गूंजे भजन

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झाबुआ में गणेशोत्सव की धूम, शिव-पार्वती की पूजा के साथ देर रात तक गूंजे भजन


झाबुआ में गणेशोत्सव की धूम, शिव-पार्वती की पूजा के साथ देर रात तक गूंजे भजन


झाबुआ में गणेशोत्सव की धूम, शिव-पार्वती की पूजा के साथ देर रात तक गूंजे भजन


झाबुआ में गणेशोत्सव की धूम, शिव-पार्वती की पूजा के साथ देर रात तक गूंजे भजन


झाबुआ में गणेशोत्सव की धूम, शिव-पार्वती की पूजा के साथ देर रात तक गूंजे भजन


झाबुआ, 15 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में मंगलवार को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। एक ओर महिलाओं ने भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा-अर्चना कर हरतालिका व्रत का अनुष्ठान किया, वहीं दूसरी ओर गणपति स्थापना के साथ जिलेभर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हो गया। मंदिरों और पूजा पंडालों में देर रात तक भजन, जागरण और धार्मिक आयोजनों की गूंज सुनाई देती रही।

जिले के विभिन्न नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित गणेश मंदिरों तथा शिवालयों में सुबह से ही पूजा-अर्चना और अभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया था। हरतालिका पर्व के अवसर पर महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की। कई स्थानों पर महिलाओं ने आकर्षक झांकियां भी सजाईं, जबकि रात्रि में जागरण और भजन कार्यक्रम आयोजित किए गए।

चारभुजा नाथ मंदिर में हुआ व्रतोद्यापन

जिला मुख्यालय स्थित श्री चारभुजा नाथ मंदिर में हरतालिका व्रतोद्यापन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने भाग लिया। महिलाओं ने व्रत का उद्यापन कर महादेव और देवी पार्वती की पूजा-अर्चना की।

इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ने के कारण दोनों पर्वों के धार्मिक अनुष्ठान भी एक साथ हुए। सामान्य तौर पर भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका पर्व और उसके अगले दिन गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना की जाती है, लेकिन इस वर्ष दोनों पर्व एक ही दिन होने से श्रद्धालुओं ने शिव-पार्वती और गणपति की पूजा एक ही दिन की।

सुबह से रात तक चला पूजा-अर्चना का दौर

जिला मुख्यालय के साथ जिले के विभिन्न नगरों और गांवों में महिलाओं ने हरतालिका एवं फुलेरा तीज का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया। सुबह से ही भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी, जो देर रात तक चलती रही। इस दौरान महिलाओं ने व्रत रखकर धार्मिक अनुष्ठान किए और आकर्षक झांकियां सजाईं। रात्रि में कई स्थानों पर जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और देर रात तक धार्मिक वातावरण बना रहा।

गणपति स्थापना के साथ शुरू हुए सांस्कृतिक आयोजन

गणेश चतुर्थी की तिथि मध्याह्न काल में लगने के कारण जिले में अलग-अलग स्थानों पर भगवान गणेश की स्थापना संध्या से लेकर देर रात तक की गई। गणपति स्थापना के बाद कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत भी हुई।

जिलेभर में घर-घर गणपति बप्पा को विराजमान किया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद भगवान गणेश की आरती उतारी। विभिन्न स्थानों पर मनमोहक झांकियां तैयार की गई हैं। गणेशोत्सव के साथ ही जिले में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया, जो आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

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