मुरैनाः अंडों से निकले घड़ियाल के 70 शावक, तीन वर्ष तक हेचरी में होगा पालन

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मुरैनाः अंडों से निकले घड़ियाल के 70 शावक, तीन वर्ष तक हेचरी में होगा पालन


मुरैनाः अंडों से निकले घड़ियाल के 70 शावक, तीन वर्ष तक हेचरी में होगा पालन


मुरैना, 23 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में राष्ट्रीय घडिय़ाल अभ्यारण्य के देवरी केन्द्र पर शनिवार खुशी का वातावरण देखा गया। वर्ष 2026 में पहली बार विलुप्त प्राय: जलीय जीव घडिय़ाल के अण्डों से एक दिवस में ही लगभग 70 शावक बाहर आये।

आगामी कुछ दिवस में लगभग 130 अण्डों से शावक बाहर आने की संभावना है। बीते 5 दशक के दौरान चम्बल नदी के 435 किलोमीटर क्षेत्र में घडिय़ाल की संख्या 2938 तक पहुंच गई है। इस वर्ष भी अण्डों से निकले शावकों को 3 वर्ष तक पालन करने के पश्चात राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभ्यारण्य के विभिन्न घाटों पर विचरण के लिये मुक्त किया जावेगा। देवरी घडिय़ाल केन्द्र से देश की अनेक नदियों सोन, केन, कूनो तथा पंजाब की नदियों में घडिय़ाल विचरण के लिये भेजे गये हैं।

घडिय़ाल की प्राकृतिक वातावरण की जीवन दर 2 फीसदी है जब कि कृत्रिम वातावरण में इनकी जीवन दर 50 फीसदी तक मानी जाती है। अण्डों से निकले शावक पानी में अठखेलियां करते दिखाई देते हैं। लगभग 20 दिवस का भोजन भी इनके शरीर में सुरक्षित रहता है। इस वर्ष 14 मई से 16 मई तक तीन दिवस के दौरान 200 अण्डे चम्बल नदी के दो घाट बरोली-श्योपुर तथा बाबूसिंह की घेर मुरैना से लाये गये थे। जिनमें से आज पहली बार शावक निकले। घडिय़ाल मादा मार्च के अंत तथा अप्रैल के प्रथम सप्ताह में नदी किनारे नदी किनारे रेत पर लगभग एक से डेढ़ फीट गहरा गड्डा (घोंसला) बनाकर 20 से 55 तक अण्डेे देती है। वन विभाग के कर्मचारी मादा घडिय़ाल के पदचिन्ह देखकर इन घोसलों की पहचान तथा चिन्हांकन करते हैं। इन अण्डों से मई के अंत तक शावक बाहर आ जाते हैं।

विलुप्त हो रहे भारतीय प्रजाती के जलीय जीव घडिय़ाल की खोज वर्ष 1975 से 1977 तक विश्व की अनेक नदियों में की गई। इस सर्वे में विश्व में पाये गये 200 घडिय़ाल में से 96 भारत में मिले। इनमें से चम्बल नदी में 46 घडिय़ाल मिले थे। केन्द्र सरकार द्वारा घडिय़ाल के संरक्षण व संवद्र्धन के लिये चम्बल नदी के 435 किलोमीटर क्षेत्र को वर्ष 1979 में राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभ्यारण्य केन्द्र घोषित किया गया। घडिय़ाल के संरक्षण हेतु अनेक पाबंदियां नदी में निर्धारित कीं गईं जिसमें नदी घाट से रेत व मिट्टी का खनन, परिवहन तथा जलीय जीवों के शिकार पर पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया था। वहीं प्राकृतिक वातावरण में घडिय़ाल की जीवन दर 2 प्रतिशत होने के कारण जिले के देवरी गांव में घडिय़ाल का केन्द्र बनाया गया।

वर्ष 1980 से आज तक चम्बल नदी के अनेक घाटों से 200 अण्डे प्रतिवर्ष देवरी केन्द्र पर लाये आते हैं। नदी के निर्धारित तापमान के अनुसार अण्डों को रेत में रखा जाता है। मादा घडिय़ाल द्वारा घोंसले में अण्डा देने के लगभग 60 दिन बाद शावक बाहर आ जाते हैं। अण्डों से आई मदरकॉल पर रेत हटाकर अण्डों को खुला छोड़ दिया जाता है। जिससे शावक बाहर जाते हैं। संक्रमण से सुरक्षित बनाये रखने के लिये कुछ देर तक पोटेशियम परमेगनेट के घोल में रखा जाता है। लगभग 20 दिवस तक भोजन शावक के शरीर में रहता है। इसलिये अति सुरक्षा की दृष्टि से हेचरी में बने छोटे पूल में रखा जाता है। घडिय़ाल की लम्बाई 1 मीटर 20 सेन्टीमीटर होने पर चम्बल नदी के विभिन्न घाट पर विचरण के लिये छोड़ा जाता है।

देवरी केन्द्र पर वर्ष 2023-24 तथा वर्ष 2025 के 240 शावक संरक्षित हो रहे हैं। समूह में रहने वाले इस प्रजाती के जीव चम्बल नदी के अनेक घाटों पर एक साथ दिखाई देते हैं। इस वर्ष श्योपुर के बरोली घाट से 105 तथा मुरैना के बाबूसिंह घेर घाट से 95 अण्डे लाये गये थे। यह पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। एशिया महाद्वीप की प्रदूषण मुक्त मानी जाने वाली चम्बल नदी को ही देश में घडिय़ाल का सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास माना जाता है। हालांकि इस प्रजाति को सुरक्षित रखने के लिये देश के अनेक नदियों में संरक्षण के लिये भेजा जा रहा है। वहां से भी उत्कृष्ट परिणाम आ रहे हैं।

पांच दशक पहले चम्बल में मिले थे 45 घडिय़ाल

विश्वव्यापी सर्वे में पाये गये 200 घडिय़ालों में से 45 चम्बल नदी में पाये गये थे। घडिय़ाल का जीवन स्वच्छ व शुद्ध पानी में व्यतीत होता है। इसलिये चम्बल नदी के रेत पर घडिय़ाल अपने परिवार की वृद्धि कर रहे हैं।

शनिवार को राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभ्यारण्य अधीक्षक, श्याम सिंह चौहान का कहना है कि इस वर्ष नदी के दो घाट से लाये गये अण्डों से शावक निकलना आरंभ हो गया है। इन्हें 3 वर्ष तक अति सुरक्षा के साथ देवरी केन्द्र पर रखा जायेगा। इसके पश्चात नदी के विभिन्न घाटों में विचरण के लिये छोड़ा जायेगा। घडिय़ाल की संख्या वृद्धि से परियोजना सफलता के नये आयाम निर्मित कर रही है।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेंद्र गौतम

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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