जबलपुर में 472 करोड़ की टी-72 ओवरहॉल परियोजना का भूमिपूजन, बढ़ेगी सेना के टैंकों की अपग्रेड क्षमता

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जबलपुर में 472 करोड़ की टी-72 ओवरहॉल परियोजना का भूमिपूजन, बढ़ेगी सेना के टैंकों की अपग्रेड क्षमता


जबलपुर, 27 अगस्त (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्ट्री में करीब 472 करोड़ रुपये की टी-72 टैंक ओवरहॉल परियोजना का भूमिपूजन किया। इस परियोजना के तहत भारतीय सेना के टी-72 टैंकों के ओवरहॉल, मरम्मत और तकनीकी उन्नयन के लिए आधुनिक सुविधा विकसित की जाएगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

रक्षा मंत्री ने परियोजना को देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश रक्षा विनिर्माण और निवेश के क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश सरकार के प्रयासों की भी सराहना की।

राजनाथ सिंह ने बदलते युद्धक्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान दौर ड्रोन और मिसाइल जैसी तकनीकों का है, लेकिन इससे टैंकों की उपयोगिता समाप्त नहीं हुई है। जरूरत है कि टैंकों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सेंसर और नई क्षमताओं से लैस कर मौजूदा युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाए।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को हर वर्ष बड़ी संख्या में टैंकों के पुनरुद्धार और रखरखाव की आवश्यकता होती है। जबलपुर में विकसित होने वाली नई सुविधा इस जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

परियोजना के पहले चरण में जबलपुर में हर साल 12 टी-72 टैंकों का पूर्ण ओवरहॉल और अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक प्लांट के साथ टैंकों के रखरखाव, मरम्मत और परीक्षण के लिए टेस्टिंग ट्रैक भी विकसित किया जाएगा।

फिलहाल टी-72 टैंकों के ओवरहॉल की मुख्य जिम्मेदारी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड की हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री, आवड़ी के पास है। जबलपुर में नई सुविधा शुरू होने से देश में टैंकों के ओवरहॉल की कुल क्षमता बढ़ेगी। इससे सेना की जरूरत के अनुसार टैंकों को कम समय में फिर से ऑपरेशनल स्थिति में लाने में मदद मिलेगी।

नई परियोजना से पहले व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने टी-72 टैंकों के ओवरहॉल का पायलट प्रोजेक्ट पूरा किया था। फैक्ट्री ने दो टी-72 टैंकों का ओवरहॉल कर उन्हें भारतीय सेना को सौंपा।

इस प्रक्रिया में सेना की तकनीकी स्पेसिफिकेशन और गुणवत्ता मानकों के अनुसार टैंकों की जांच, मरम्मत और आवश्यक पुर्जों को बदलने का काम किया गया। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद जबलपुर में इस क्षमता को स्थायी रूप से विकसित करने का रास्ता साफ हुआ है।

रक्षा मंत्री ने देश में रक्षा उत्पादन में हुई वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी करीब 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है।

सरकार ने वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत रक्षा उपकरणों के निर्माण के साथ उनकी मरम्मत, रखरखाव और तकनीकी अपग्रेडेशन की क्षमताओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

जबलपुर लंबे समय से देश के रक्षा उत्पादन तंत्र का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। शहर में व्हीकल फैक्ट्री सहित कई रक्षा निर्माणियां सेना के लिए विभिन्न उपकरण और प्रणालियां तैयार करती हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में जबलपुर की चार प्रमुख रक्षा निर्माणियों ने मिलकर 4,622 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड उत्पादन किया। इनमें व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का उत्पादन करीब 1,056 करोड़ रुपये रहा। टी-72 ओवरहॉल परियोजना से जबलपुर की रक्षा क्षेत्र में भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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