उमरिया : बांधवगढ़ की प्रसिद्ध बाघिन डॉटी की मौत, दो शावकों की निगरानी में जुटा पार्क प्रबंधन
उमरिया, 10 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले स्थित विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध बाघिन डॉटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को मानपुर बफर क्षेत्र के मझखेता बीट में गश्त के दौरान उसका शव मिला था। पार्क प्रबंधन के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षण में मौत का कारण प्राकृतिक प्रतीत हुआ है। हालांकि, विस्तृत जांच के लिए आवश्यक नमूने एकत्र कर विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं। डॉटी के करीब 15 से 16 माह के दो शावक भी अपनी मां से अलग विचरण करते मिले हैं। प्रबंधन उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
शनिवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि 9 अक्टूबर को हाथी से गश्त के दौरान मानपुर बफर रेंज के मझखेता बीट में मादा बाघ का शव दिखाई दिया। इसकी सूचना मिलते ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत घटनास्थल को घेरकर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। शाम को डॉग स्क्वाड की मदद से मृत बाघिन और आसपास के क्षेत्र की सघन जांच कराई गई। इस दौरान कोई संदिग्ध वस्तु या गतिविधि सामने नहीं आई।
10 अक्टूबर को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी और विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी के दल ने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शव विच्छेदन एवं परीक्षण किया। पूरी कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई। जांच के लिए आवश्यक नमूने एकत्र किए गए हैं, जिन्हें आगे की पड़ताल के लिए विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है।
क्षेत्र संचालक के मुताबिक, शुरुआती परीक्षण में बाघिन की मौत प्राकृतिक कारणों से होने की संभावना सामने आई है। एनटीसीए की एसओपी के अनुसार, समिति की मौजूदगी में शव परीक्षण के बाद शवदाह की कार्रवाई की जा रही है।
मृत बाघिन की पहचान बांधवगढ़ की प्रसिद्ध बाघिन डॉटी के रूप में हुई है। उसके दोनों शावकों की उम्र लगभग 15 से 16 माह बताई गई है। मां से अलग होकर विचरण करते मिले इन शावकों की सुरक्षा को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रबंधन उनकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रहा है।
वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के समापन के बाद बाघिन डॉटी की मौत की खबर सामने आने से वन्यजीव प्रेमियों में चिंता है। इस घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण के लिए जंगल के भीतर की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के दौरान होने वाले आयोजनों के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा, निगरानी और उनके प्राकृतिक आवास की देखरेख पर भी पर्याप्त ध्यान दिए जाने की अपेक्षा जताई जा रही है।
वहीं, बाघिन की मौत से संबंधित स्थान के कक्ष क्रमांक और उसके आरक्षित वन अथवा संरक्षित वन क्षेत्र में होने की जानकारी मांगे जाने पर क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने यह विवरण देने से इनकार कर दिया। बाघिन की मौत के कारणों की अंतिम पुष्टि अब आगे की जांच और प्रयोगशाला परीक्षणों के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी

