दमोह में गहराया पेयजल संकट, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के सामने बड़ी चुनौती

WhatsApp Channel Join Now
दमोह में गहराया पेयजल संकट, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के सामने बड़ी चुनौती


दमोह में गहराया पेयजल संकट, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के सामने बड़ी चुनौती


दमोह, 01 मई (हि.स.) मध्‍य प्रदेश के दमोह शहर में लगातार गहराते पेयजल संकट ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही शहर के कई वार्डों में जलापूर्ति अनियमित हो गई है। कई क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर पानी पहुंच रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर दो-दो दिन तक नलों में पानी नहीं आने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे हालात में जिले का कार्यभार संभालने वाले नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के सामने सबसे बड़ी प्राथमिक चुनौती शहर की पेयजल व्यवस्था को सुचारु करना बन गई है।

जानकारी के अनुसार, शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बीते वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन गर्मी बढ़ते ही व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आने लगी है। नई पाइपलाइन विस्तार, फिल्टर प्लांट उन्नयन और वितरण नेटवर्क सुधार के दावों के बावजूद शहर के 15 से अधिक वार्ड प्रभावित बताए जा रहे हैं। सिविल वार्ड, मांगज क्षेत्र, नया बाजार, फुटेरा, बजरिया और धरमपुरा के कई हिस्सों में पर्याप्त दबाव से पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हैं।

सूत्रों के अनुसार, जुझार घाट इंटेकवेल से पर्याप्त पंपिंग नहीं हो पाना, बिजली आपूर्ति में व्यवधान, ओवरहेड टंकियों का समय पर नहीं भरना तथा वितरण पाइपलाइन में प्रेशर असंतुलन जैसी समस्याओं ने जलापूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है। वहीं बढ़ती गर्मी के कारण पानी की मांग में वृद्धि होने से संकट और गहरा गया है।

पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जल शोधन संयंत्र और फिल्टर प्लांट का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से तकनीकी जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में पेयजल आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए।

शहरवासियों का कहना है कि पेयजल व्यवस्था सुधारने के नाम पर वर्षों से बड़े स्तर पर कार्य कराए गए, लेकिन हर गर्मी में जल संकट की स्थिति बनना नगर पालिका की दीर्घकालिक योजना पर प्रश्नचिह्न लगाता है। कई क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने के बाद भी पर्याप्त प्रेशर से पानी नहीं पहुंच रहा, जबकि वार्डों में टंकियों के भराव और वितरण समय को लेकर भी स्पष्ट निगरानी नजर नहीं आ रही।

जल संकट के बीच लोगों को निजी साधनों, हैंडपंपों और सीमित वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। सुबह-शाम पानी भरने को लेकर मोहल्लों में भीड़ का माहौल है। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित वार्डों में नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन इसके साथ ही पूरी वितरण व्यवस्था की तकनीकी समीक्षा और जिम्मेदार बिंदुओं की पहचान भी जरूरी मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टैंकरों और अस्थायी प्रबंधन से समस्या का समाधान संभव नहीं होगा, बल्कि स्रोत से लेकर अंतिम छोर तक जलापूर्ति तंत्र का परीक्षण कर सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

Share this story