दमोह: नेशनल लोक अदालत में सुलह और समझौते से समाप्त हुए आपसी विवाद, जिले में 268 प्रकरणों का निराकरण
दमोह, 09 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आमजन को त्वरित, सस्ता एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को दमोह जिले में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें सुलह और समझौते के आधार पर कुल 268 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
जिला मुख्यालय स्थित एडीआर भवन में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मोहम्मद अजहर, विशेष न्यायाधीश एवं प्रभारी अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत उदय सिंह मरावी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्नेहा सिंह सहित जिले के समस्त न्यायाधीशगण उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य दांडिक, दीवानी, धनादेश अनादरण, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा, वैवाहिक, विद्युत तथा अन्य प्रकरणों को निराकरण के लिए रखा गया था। इसके साथ ही बैंक, दूरसंचार, विद्युत एवं नगरपालिका से संबंधित प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का भी निराकरण किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना के 7 प्रकरणों में 49 लाख 25 हजार रुपये के अवार्ड पारित किए गए। वहीं विद्युत के 46, वैवाहिक के 14, धनादेश अनादरण के 19 तथा दांडिक के 78 प्रकरणों सहित कुल 268 प्रकरणों का निराकरण कर कुल 2 करोड़ 50 लाख 53 हजार 417 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। इसके अतिरिक्त बैंक, विद्युत एवं नगरपालिका से संबंधित 266 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण कर 65 लाख 517 रुपये की वसूली की गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत में कई ऐसे पारिवारिक विवादों का भी समाधान हुआ, जिन्होंने लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगाई। कुटुंब न्यायालय में लंबित एक भरण-पोषण प्रकरण में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद समझाइश के बाद समाप्त हो गया। जानकारी के अनुसार पति द्वारा पत्नी से शासन की लाड़ली बहना योजना से प्राप्त राशि की मांग किए जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके बाद पत्नी अपने दो बच्चों के साथ अक्टूबर 2024 से मायके में रह रही थी। बाद में उसने वर्ष 2025 में भरण-पोषण के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था।
राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों को बुलाकर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मोहम्मद अजहर, सुलहकर्ता सदस्यों एवं अधिवक्ताओं द्वारा समझाइश दी गई। इसके बाद पति-पत्नी ने एक-दूसरे को माला पहनाकर आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर दिया और भविष्य में विवाद न करने का संकल्प लिया। दोनों खुशी-खुशी साथ रवाना हुए। इस अवसर पर उन्हें स्मृति स्वरूप फलदार पौधे भी भेंट किए गए तथा पौधों की देखभाल बच्चों की तरह करने की सलाह दी गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से कुटुंब न्यायालय में लंबित 12 प्रकरणों में दंपत्तियों ने आपसी मतभेद भुलाकर साथ रहने का संकल्प लिया। इस भावनात्मक दृश्य ने न्यायालय परिसर में उपस्थित लोगों को भी भावुक कर दिया। लोगों ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल मामलों के निराकरण का माध्यम नहीं, बल्कि टूटते परिवारों को जोड़ने और समाज में सौहार्द स्थापित करने का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

