दमोह मेडिकल कॉलेज को शासकीय स्तर पर चलाने की मांग, जयंत मलैया ने मुख्यमंत्री से पुनर्विचार का किया आग्रह

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दमोह मेडिकल कॉलेज को शासकीय स्तर पर चलाने की मांग, जयंत मलैया ने मुख्यमंत्री से पुनर्विचार का किया आग्रह


दमोह, 24 सितंबर (हि.स.)। निर्माणाधीन दमोह मेडिकल कॉलेज को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर दमोह विधायक जयंत मलैया ने पुनर्विचार की मांग की है। गुरुवार को अपने निवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज को शासकीय स्तर पर संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर मौखिक चर्चा करने के साथ लिखित रूप से भी अपनी आपत्ति दर्ज कराने की जानकारी दी।

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कई मेडिकल कॉलेजों के लिए पीपीपी मॉडल अपनाने की प्रक्रिया की जानकारी हाल में सामने आई है। केंद्र सरकार ने भी 18 सितंबर को मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार में पीपीपी मॉडल के इस्तेमाल का उल्लेख किया था।

विधायक मलैया ने कहा कि दमोह मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए करीब 355 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण सहित अन्य कार्यों पर बड़ी राशि खर्च की जा चुकी है। मेडिकल कॉलेज के फर्नीचर और उपकरणों के लिए करीब 25.93 करोड़ रुपये तथा अस्पताल भवन में बायोमेडिकल उपकरणों की स्थापना के लिए लगभग 20.15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

उन्होंने मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 12.14 हेक्टेयर भूमि आवंटित होने की भी जानकारी दी। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से भी छतरपुर, दमोह और बुधनी में मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई है।

मलैया ने कहा कि इतनी बड़ी राशि से तैयार हो रहा मेडिकल कॉलेज दमोह और आसपास के क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सा शिक्षा, रोजगार और क्षेत्रीय विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। उन्होंने कहा कि जिले की बड़ी आबादी कृषि और सीमित आय पर निर्भर है। ऐसे में शासकीय स्तर पर मेडिकल कॉलेज संचालित होने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

पत्रकार वार्ता में विधायक ने दमोह में नवीन गीता भवन यानी ऑडिटोरियम के निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि आधुनिक ऑडिटोरियम बनने से शहर में सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। उन्‍होंने नगर पालिका परिषद से संबंधित जांच और पूर्व में सामने आए कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर भी सवाल किए। इस पर मलैया ने कहा कि नगर पालिका से संबंधित जांच अंतिम चरण में है और करीब एक सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आ सकती है।

निर्माणाधीन बस टर्मिनल को लेकर विधायक ने कहा कि निर्माण कार्य की गति धीमी है और इसमें कुछ व्यवधान भी आए हैं, लेकिन काम जारी है। उन्होंने कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद यह प्रदेश के बेहतर बस टर्मिनलों में शामिल हो सकता है।

बेलाताल पार्क के संचालन को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है। उनके अनुसार केंद्र सरकार की ओर से यहां आकर पार्क का संचालन किया जाना संभव नहीं है, इसलिए स्थानीय स्तर पर इसके संचालन की व्यवस्था विकसित करनी होगी।

वित्तीय संसाधनों के संबंध में पूछे गए सवाल पर मलैया ने कहा कि वित्तीय सीमाएं केवल मध्य प्रदेश में नहीं हैं, बल्कि देश के कई राज्यों के सामने भी ऐसी स्थिति है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के बीच विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना जरूरी है।

उन्होंने कृषि और सिंचाई क्षेत्र से जुड़ी सतधरू, सीतानगर, पंचमनगर, साझली और जुड़ी सहित विभिन्न सिंचाई एवं स्टॉपडैम परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक समृद्धि का सीधा असर स्थानीय बाजार और जिले की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

मलैया ने एक बार फिर दमोह मेडिकल कॉलेज के पीपीपी मॉडल पर अपनी आपत्ति दोहराते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष इस संबंध में मौखिक और लिखित दोनों स्तर पर अपनी बात रख दी है। अब इस प्रस्ताव पर सरकार के निर्णय का इंतजार है।

हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

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