दमोहः कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में ग्रामीण की गुहार, बोला- मैं मरा नहीं हूं, मुझे कागजों में जिंदा कर दो

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दमोहः कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में ग्रामीण की गुहार, बोला- मैं मरा नहीं हूं, मुझे कागजों में जिंदा कर दो


दमोहः कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में ग्रामीण की गुहार, बोला- मैं मरा नहीं हूं, मुझे कागजों में जिंदा कर दो


दमोहः कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में ग्रामीण की गुहार, बोला- मैं मरा नहीं हूं, मुझे कागजों में जिंदा कर दो


दमोह, 28 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पथरिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिपरिया छक्का निवासी बलराम पटेल पिछले डेढ़ वर्ष से हर अधिकारी, हर जनप्रतिनिधि और हर मंच पर केवल एक ही गुहार लगा रहा है—साहब... मैं जिंदा हूं, मुझे कागजों में जिंदा कर दीजिए।

मंगलवार को बलराम पटेल अपनी पीड़ा लेकर दमोह कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचे। अधिकारियों के सामने उन्होंने फिर वही दर्द बयां किया कि सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम के आगे स्वर्गीय दर्ज होने के कारण उनका पूरा परिवार सजा भुगत रहा है। न उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है और न ही उनके बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं।

बलराम पटेल का कहना है कि एक जीवित व्यक्ति को सरकारी कागजों में मृत घोषित किए हुए 15 महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज तक कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी पहचान बहाल नहीं करा पाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ऐसी गलती, जिसे कुछ मिनटों में सुधारा जा सकता है, उसे ठीक करने में डेढ़ साल क्यों लग रहे हैं?

उन्होंने आरोप लगाया कि यह गड़बड़ी ग्राम के तत्कालीन सहायक सचिव गिरधारी पटेल के कार्यकाल में हुई, जो वर्तमान में जनपद पंचायत पथरिया में अटैच हैं। बलराम का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित कर्मचारी से संपर्क कर रिकॉर्ड सुधारने की मांग की, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया।

बलराम का आरोप है कि जब उन्होंने बार-बार आग्रह किया तो कथित तौर पर उन्हें जवाब मिला—जहां जाना है चले जाओ... हमारे पास समय नहीं है। इसके बाद उन्होंने पंचायत से लेकर जनपद, जिला कार्यालय और जनसुनवाई तक कई बार आवेदन दिए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं।

मंगलवार को भी अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी समग्र आईडी में सुधार की प्रक्रिया की जाएगी और कुछ समय लगेगा। हालांकि बलराम का कहना है कि यह भरोसा वह पिछले 15 महीनों से सुन रहे हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में आज भी वह 'स्वर्गीय' ही बने हुए हैं।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि कोई नागरिक अपनी जीवित होने की पहचान के लिए महीनों तक भटकता रहे, तो आम आदमी का व्यवस्था पर विश्वास कैसे कायम रहेगा?

इस संबंध में जब जनपद पंचायत पथरिया में अटैच सहायक सचिव गिरधारी पटेल से दूरभाष पर उनका पक्ष जानना चाहा गया तो उन्होंने बलराम पटेल द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा, निराधार और बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

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