दमोह में निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, हाईटेंशन लाइन और संकरे रास्तों वाले स्कूलों की जांच की तैयारी
दमोह, 4 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में राजकीय बालिका छात्रावास में छज्जे का प्लास्टर गिरने की घटना के बाद अब शहर के कई निजी विद्यालयों के भवन भी जांच के दायरे में आ गए हैं। आरोप है कि कुछ स्कूल ऐसे स्थानों पर संचालित हो रहे हैं, जहां हाईटेंशन बिजली लाइनें बेहद नजदीक हैं या फिर विद्यालयों तक पहुंचने का मार्ग इतना संकरा है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर हुई पड़ताल में वैशाली नगर के पीछे स्थित वर्धमान कॉलोनी के एक निजी विद्यालय का भवन हाईटेंशन विद्युत लाइन के काफी करीब होने की बात सामने आई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि बिजली लाइन में कोई तकनीकी खराबी, तार टूटने या अन्य दुर्घटना होती है तो विद्यार्थियों की सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ सकती है।
जानकारों का कहना है कि स्कूल भवनों के संचालन के दौरान विद्युत सुरक्षा, भवन की संरचनात्मक मजबूती और अग्निशमन संबंधी सभी मानकों का पालन किया जाना आवश्यक है। इन नियमों की अनदेखी बच्चों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
विद्युत विभाग के अभियंता मोतीलाल साहू ने बताया कि हाईटेंशन लाइनों की अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार सुरक्षा दूरी निर्धारित है और उस सीमा के भीतर निर्माण की अनुमति नहीं होती। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय का संचालन निर्धारित मानकों का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इधर, ग्राम पंचायत आमचोपरा के सरपंच जयपाल सिंह यादव ने भी माना कि हाईटेंशन लाइन के नीचे अथवा निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र में भवन निर्माण उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लिया जाएगा और यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ बिजली लाइनों का मामला ही नहीं, बल्कि शहर के कुछ निजी विद्यालय ऐसे भी बताए जा रहे हैं जहां पहुंच मार्ग अत्यंत संकरा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग, भूकंप या अन्य आपदा की स्थिति में फायर ब्रिगेड और बचाव दल के वाहनों को मौके तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है, जिससे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण बन सकता है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने भी जांच के संकेत दिए हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण फुलपगारे ने कहा कि जिले के स्कूल भवनों का परीक्षण कराया जाएगा। यदि कहीं भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी या विद्यार्थियों के लिए खतरे जैसी स्थिति पाई जाती है तो संबंधित संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया ने भी स्पष्ट किया कि संबंधित विद्यालयों की जांच कराई जाएगी। भवन सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था या अन्य आवश्यक मानकों में किसी प्रकार की कमी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस बीच अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जिले के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, ताकि किसी संभावित हादसे से पहले ही कमियों को दूर कर विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

