दमोहः कलेक्टर ने किया पंजीयक कार्यालय का निरीक्षण, ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद टोकन रजिस्टर मिलने पर जब्त कराया
दमोह, 15 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में भूमि पंजीयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने तथा जमीनों के हस्तांतरण में नियमों की अनदेखी संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने गुरुवार को पंजीयक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया।
इस दौरान शासन के संपदा 2.0 पोर्टल पर ऑनलाइन टोकन व्यवस्था लागू होने के बावजूद कार्यालय में अलग से रजिस्टर संचालित किए जाने का मामला सामने आया। कलेक्टर के निर्देश पर उक्त रजिस्टर जब्त कर लिया गया है तथा मामले में जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने बताया कि पिछले कुछ समय से पंजीयन कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इनमें वास्तविक भूमि स्वामी के नाम के साथ 'उर्फ' जोड़कर अथवा मिलते-जुलते नामों और दस्तावेजों के आधार पर जमीनों का विक्रय कराने की आशंकाएं भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नजूल एवं पट्टे की भूमि को आवश्यक अनुमति के बिना हस्तांतरित करने तथा कॉलोनियों में निर्मित मकानों का पंजीयन केवल खाली भूखंड के रूप में कराए जाने संबंधी शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में भूमि स्वामियों के अधिकार प्रभावित होने के साथ शासन को स्टाम्प शुल्क के रूप में राजस्व हानि होने की आशंका व्यक्त की गई है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पाया कि संपदा 2.0 पोर्टल के माध्यम से टोकन बुकिंग और पंजीयन की ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद कार्यालय परिसर में एक अलग रजिस्टर में टोकन संबंधी प्रविष्टियां की जा रही थीं। उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए रजिस्टर जब्त कराने के निर्देश दिए। साथ ही यह जांच करने को कहा कि उक्त रजिस्टर किसके निर्देश पर संचालित किया जा रहा था और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
इस दौरान कार्यालय के एक चेंबर में टेबल पर रखी नकद राशि को लेकर भी पूछताछ की गई। संबंधित युवक ने राशि सर्विस प्रोवाइडर की बताई, जबकि सर्विस प्रोवाइडर ने उसे किसी व्यक्ति को देने के लिए लाने की बात कही। कलेक्टर ने राशि के स्रोत और उद्देश्य की जांच कराने तथा पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कार्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की। संबंधित युवक द्वारा पिछले सात दिनों से कार्यालय में बैठने की जानकारी दिए जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी अनधिकृत व्यक्ति को कार्यालय में बैठकर पंजीयन संबंधी कार्य करने की अनुमति किसने दी, इसकी जांच की जाएगी। कार्यालय परिसर में नियमविरुद्ध गतिविधियों को रोकना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि शासन की मंशा भूमि पंजीयन प्रक्रिया को पारदर्शी, सुविधाजनक और फेसलेस बनाना है, ताकि किसानों और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। पंजीयन के दौरान स्टाम्प ड्यूटी, पंचायत उपकर, नगरीय उपकर सहित अन्य निर्धारित शुल्क ही लिए जाने चाहिए। दस्तावेज लेखन और अन्य सेवाओं के नाम पर निर्धारित राशि से अधिक वसूली स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने बताया कि आम नागरिकों को शुल्क संबंधी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के पंजीयन कार्यालयों एवं सर्विस प्रोवाइडरों के यहां निर्धारित शुल्क के सूचना बोर्ड लगवाए जाएंगे। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।
कलेक्टर ने कहा कि भूमि हस्तांतरण, दस्तावेजों के सत्यापन और संपत्ति के मूल्यांकन से संबंधित शिकायतों की जांच कराई जाएगी। जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने किसानों और आम नागरिकों से अपील की कि रजिस्ट्री कराते समय केवल निर्धारित शासकीय शुल्क का भुगतान करें। यदि कोई व्यक्ति अतिरिक्त राशि की मांग करता है अथवा पंजीयन प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी उत्पन्न करता है, तो इसकी शिकायत संबंधित कार्यालय में करें।
निरीक्षण के दौरान जब्त रजिस्टर, नकद राशि तथा अन्य शिकायतों के संबंध में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और किसी संभावित अनियमितता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

