जबलपुरः कई थानों का वॉन्टेड इनामी आरोपी रमाकांत सतनामी गिरफ्तार

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जबलपुरः कई थानों का वॉन्टेड इनामी आरोपी रमाकांत सतनामी गिरफ्तार


जबलपुर, 22 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में लम्बे समय से जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े कथित आरोपी रमाकांत सतनामी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

शिकायतकर्ता प्रखर पाठक ने रविवार को बताया कि उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में परिवाद दायर किया था। आरोप है कि वर्ष 2018-2019 में उनके माता-पिता को जिन विक्रय पत्रों के माध्यम से भूमि बेची गई, वह भूमि पूर्व में ही किसी अन्य को विक्रय की जा चुकी थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि आदिवासी श्रेणी की भूमि को सामान्य वर्ग की बताकर दोबारा बेचा गया और वास्तविक स्थिति छुपाकर आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।

मामले में एक अन्य गंभीर आरोप यह है कि ग्राम खापा ग्वारी निवासी मस्का बर्मन, जिनका वर्ष 2017 में निधन हो चुका था, उनके नाम दर्ज भूमि का वर्ष 2019 में पुनः विक्रय किया गया। आरोप है कि रजिस्ट्री कार्यालय में मृतक के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत कर दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस के अनुसार विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज समान प्रकृति के मामलों के बाद पुलिस ने तलाश तेज की और अंततः उसे हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

◆ कई थानों में है मामले दर्ज

रमाकांत के ऊपर विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज हैं जिनमें, बरगी थाना में अपराध क्रमांक 469/2025, गोरखपुर थाना में – अपराध क्रमांक 117/2026, बरेला थाना में अपराध क्रमांक 354/2025, गोहलपुर थाना अपराध क्रमांक 0075/2025, ग्वारीघाट थाना अपराध क्रमांक 0023/2025 में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (कूटरचना), 471 (कूटरचित दस्तावेज का उपयोग) तथा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) सहित अन्य धाराएँ लागू की गई हैं।पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा, जिसके चलते उस पर 23 हजार का इनाम घोषित किया गया था। विभिन्न थाना क्षेत्रों में समान प्रकृति के अपराध दर्ज होने से जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को संगठित भूमि फर्जीवाड़ा नेटवर्क के रूप में भी देख रही हैं।

◆ फरार होते हुए भी करता रहा रजिस्ट्री

रमाकांत की हिम्मत कहें या मिलीभगत कि उसका नेटवर्क इतना पुख्ता था कि वह फरारी के दौरान खुलेआम रजिस्ट्री ऑफिस आकर रजिस्ट्री करता रहा, जबकि उसके ऊपर इनाम घोषित था। इस दौरान क्या वह किसी के नज़र में नहीं आया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान और भी मामलों का खुलासा संभव है तथा अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच जारी है।

◆ सजा के बाद मिली जमानत के बाद भी करता रहा अपराध

22 जून 2023 को आरोपी रमाकांत सतनामी को प्रकरण क्रमांक 32/2013, थाना विजयनगर में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 472 एवं 120-B के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए न्यायालय द्वारा 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। उक्त प्रकरण में यह सिद्ध हुआ था कि आरोपी द्वारा तहसीलदार की फर्जी सील तैयार कर उपयोग की गई, पटवारी एवं आर.आई. के कूटरचित (फर्जी) हस्ताक्षर किए गए, फर्जी विक्रेताओं को खड़ा कर दस्तावेज निष्पादित कराए गए, फर्जी गवाह प्रस्तुत किए गए, कई फर्जी मुक्तियारनामा एवं रजिस्ट्रियाँ तैयार कराई गईं, फर्जी बही एवं ऋण पुस्तिकाएँ बनवाई गईं, जिससे धोखाधड़ीपूर्वक संपत्ति संबंधी लाभ अर्जित किया गया। उक्त दोषसिद्धि के पश्चात आरोपी को वर्ष 2024 में माननीय उच्च न्यायालय से जमानत प्राप्त हुई। जमानत पर रिहा होने के उपरांत वर्ष 2025 में आरोपी के विरुद्ध पुनः उसी प्रकार के अपराधों के लगभग पाँच प्रकरण विभिन्न थानों में दर्ज हुए, जिनमें फर्जी विक्रेताओं को प्रस्तुत कर रजिस्ट्री कराई गई, मृत व्यक्तियों को जीवित दर्शाकर संपत्ति का हस्तांतरण कराया गया, कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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