अनूपपुर: दूषित पानी और मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में अनूपपुर में कांग्रेस का उपवास

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अनूपपुर: दूषित पानी और मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में अनूपपुर में कांग्रेस का उपवास


अनूपपुर, 17 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय में शनिवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे बदलाव और इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के विरोध में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मांगा इस्तीफा एवं दोषी अधिकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर कानूनी कार्यवाही की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने इंदिरा चौक के पास में उपवास रखकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।

मनरेगा का नाम बदलने का विरोध

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष गुड्डू चौहान ने कहा सरकार मनरेगा के बजट में कटौती और नियमों में बदलाव कर मजदूरों से उनके काम का कानूनी अधिकार छीनने का प्रयास कर रही है. यदि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाली इस योजना से छेड़छाड़ बंद नहीं हुई तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 23 मौतों को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस त्रासदी के प्रति असंवेदनशील है और जिम्मेदार लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह घटना केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम है।

जिला पंचायत अध्यक्षा प्रीति रमेश सिंह ने मनरेगा में हुए बदलावों पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के नाम और मूल कानूनों में ऐसे संशोधन किए हैं, जिनसे गरीब मजदूरों को मिलने वाले अधिकार और लाभ कमजोर हुए हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को सम्मानजनक रोजगार प्रदान करना था, लेकिन मौजूदा सरकार की नीतियों से यह प्रभावित हुआ है।

विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी से हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी अब तक इंदौर महापौर को पद से नहीं हटाया गया है। प्रशासन की अनदेखी मासूमों की जान ले रही है और सरकार मौन है। इंदौर जैसे बड़े शहर में दूषित पानी के कारण लोगों की मौत होना प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंत्री अहंकारी हैं और उन्हें इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि भागीरथपुरा हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाए।

कांग्रेसियों ने इंदौर त्रासदी के पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की। उपवास के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी गई कि यदि मनरेगा के मूल स्वरूप को बहाल नहीं किया गया और जल त्रासदी के दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कांग्रेस का मानना है कि भाजपा की मानसिकता महात्मा गांधी के विचारों के विपरीत है। इसलिए पार्टी ने मांग की कि मनरेगा योजना और उसके मूल कानूनों को बिना किसी बदलाव के लागू किया जाना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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