अनूपपुर: बिजुरी की घटना पर पुलिस की भूमिका पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

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अनूपपुर: बिजुरी की घटना पर पुलिस की भूमिका पर कांग्रेस ने उठाए सवाल


अनूपपुर, 22 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के बिजुरी क्षेत्र में हुई गुरूवार रात हृदय विदारक घटना के बाद पुलिस जांच और जारी किए गए प्रेस नोट पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस और स्थानीय लोगों द्वारा जांच की निष्पक्षता पर संदेह जताया जा रहा है। जिसे लेकर शुक्रवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुड्डू चौहान के नेतृत्व में विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सिंह, जेपी श्रीवास्तव, संतोष पाण्डेय, निर्भय नारायण राव, डॉ व्हीपीएस चौहान, संतोष मिश्रा, आशु चतुर्वेदी, मनोज बर्मन, रफी अहमद और महेश धनवार ने पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब से मिल कर ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इस दौरान पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

ज्ञात हो कि घटना के बाद बिजुरी पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी, लेकिन पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल पीड़िता की उम्र को लेकर खड़ा हुआ है। पुलिस ने प्रेस नोट में युवती की उम्र 20 वर्ष बताई है, जबकि जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुड्डू चौहान ने पीड़िता को 17 वर्षीय नाबालिग बताया है। उनका आरोप है कि पीड़ित परिवार डरा और सहमा हुआ है।

ज्ञापन में कहा गया कि 20 मई 2026 को बिजुरी निवासी नाबालिग बच्ची की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हुई थी। सोशल मीडिया में घटना को सामूहिक दुष्कर्म से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन पुलिस ने बिना निष्पक्ष एवं सूक्ष्म जांच किए इसे लूट का मामला बताकर आरोपियों को बचाने और अपनी जवाबदेही से बचने का प्रयास किया है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पीड़िता की उम्र गलत दर्शाते हुए उसे 20 वर्षीय बताया, जबकि वह नाबालिग थी। ज्ञापन में मांग की गई कि थाना प्रभारी को तत्काल हटाकर विभागीय जांच कराई जाए। जिसे पुलिस फरियादी बता रही है, वह स्वयं पीड़िता को सुनसान स्थान पर लेकर गया था। उसका मेडिकल परीक्षण कराकर उसके नाबालिग होने से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं तथा वैधानिक कार्रवाई की जाए।

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि गैंगरेप की आशंका थी तो आरोपियों के अंतःवस्त्र जब्त कर मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया। परिजनों के अनुसार पीड़िता के शरीर से खून निकल रहा था, लेकिन पुलिस ने इसे जांच में शामिल नहीं किया और न ही प्रेस नोट में इसका उल्लेख किया।

ज्ञापन में यह भी दावा किया गया कि पीड़िता के हाथ में किसी आरोपी के बाल थे, जिन्हें उसने संघर्ष के दौरान नोचा था, लेकिन इस पहलू की वैज्ञानिक जांच नहीं कराई जा रही है। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि पीड़िता का कथित मुंहबोला भाई, जो बिहार का निवासी बताया जा रहा है, पीड़िता को अस्पताल लाया और उसके कपड़ों पर खून लगा था, फिर भी पुलिस ने इस दिशा में जांच नहीं की। पुलिस की उस थ्योरी पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया कि पीड़िता की मौत मुंह और नाक दबाने से दम घुटने के कारण हुई। उनका कहना है कि यदि हत्या ही उद्देश्य होता तो अन्य तरीके भी अपनाए जा सकते थे, इसलिए पुलिस तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। पुलिस ने पीड़िता के दिल का इलाज चलने की बात कही, जबकि परिजनों ने इसे सिरे से नकार दिया है और पुलिस के पास कोई मेडिकल प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि मामले की जांच अनुविभाग के बाहर के अधिकारियों से कराई जाए तथा पीड़िता, कथित भाई और फरियादी के मोबाइल फोन डिटेल की भी जांच हो। साथ ही पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने और निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करने की मांग की साथ ही चेतावनी दी कि यदि समयबद्ध निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो जिला कांग्रेस आम जनता के साथ बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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