झाबुआ: रक्षाबंधन के पारिवारिक स्नेह, सौहार्द पर्व पर रैखांकित हुई प्रशासनिक संवेदनशीलता एवं अपनापन
झाबुआ, 28 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिले में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। इस पर्व पर एक तरफ जहां पारिवारिक स्नेह, सौहार्द की स्वाभाविक भावनाओं ने मूर्त रुप ग्रहण किया, वहीं दूसरी तरफ संवेदनशील प्रशासनिक कार्यप्रणाली एवं सोच भी रैखांकित हुई।
धार्मिक सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पारिवारिक स्नेह, सौहार्द का प्रतीक रक्षा बंन्धन पर्व आज शुक्रवार को संपूर्ण जिले में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। प्रातः काल के शुभ मुहूर्त में भगवान् के दर्शन कर राखी समर्पित करने के साथ ही परिवार जनों को राखी बांधने का सिलसिला जारी है। इस खास पर्व पर एक तरफ परिवारों में जहां हर्षोल्लास का वातावरण निर्मित होते देखा गया, वहीं दूसरी तरफ संवेदनशील प्रशासनिक कार्य प्रणाली एवं सोच भी दिखाई दी।
आज इस अवसर पर जिले के मुखिया डॉ योगेश तुकाराम भरसट प्रशासनिक संवेदनशीलता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सपरिवार सिकल सेल वॉरियर हार्दिक सिंगाड़िया एवं रिशिता सिंगाड़िया के घर पहुंचे, और उनके परिवार के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया, यही नहीं बल्कि जिला कलेक्टर डॉ भरसट ने आमली फलिया निवासी सिकल सेल वाहक, पायल वाखला एवं विजय वाखला को भी रक्षाबंधन पर्व मनाने के लिए अपने निवास पर आमंत्रित किया, जहां बच्चों के साथ आत्मीय वातावरण में रक्षाबंधन मनाया और उन्हें पर्व की शुभकामनाएं दी।
इस दौरान बच्चों ने कलेक्टर को स्नेहपूर्वक राखी बांधी, बदले में कलेक्टर ने बच्चों के साथ बड़ी ही आत्मीयता से बातचीत करते हुए उन्हें रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं दी और उनके स्वस्थ, खुशहाल एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पर्व के आत्मीय वातावरण में कलेक्टर के परिवार जनों ने भी बच्चों और उनके परिजनों के साथ समय बिताया तथा रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं।
रक्षाबंधन के अवसर पर सिकल सेल प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के साथ जिला कलेक्टर के आत्मीय जुड़ाव की भावाभिव्यक्ति से प्रभावित परिवार अभिभूत हो गया। भावुकता के उन क्षणों में सिकल सेल मित्र’ के रूप में कलेक्टर ने बच्चों को यह विश्वास दिलाया कि स्वास्थ्य एवं उपचार की इस यात्रा में जिला प्रशासन सदैव उनके साथ है।
आज इस खास मौके पर कलेक्टर डॉ. भरसट ने जिले के अन्य ‘सिकल सेल मित्रों’ से भी आह्वान किया कि वे अपने से जुड़े सिकल सेल वॉरियर्स एवं वाहकों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें, तथा केवल उनके स्वास्थ्य एवं उपचार की जानकारी लेने तक सीमित न रहकर त्योहारों एवं विशेष अवसरों पर उनके साथ समय बिताएं, उनका उत्साहवर्धन करें और आवश्यकता के समय उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सिकल सेल मित्र संवेदनशीलता और आत्मीयता के साथ अपनी भूमिका निभाए, जिससे सिकल सेल से प्रभावित बच्चों एवं परिवारों को यह विश्वास मिले कि वे अकेले नहीं हैं और पूरा प्रशासन उनके साथ खड़ा हुआ है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

