जबलपुर : मुख्यमंत्री से मिलने जा रही पीड़िता को पुलिस ने रोका, हिरासत के आरोपों से बढ़ा विवाद

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जबलपुर : मुख्यमंत्री से मिलने जा रही पीड़िता को पुलिस ने रोका, हिरासत के आरोपों से बढ़ा विवाद


जबलपुर, 01 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दोबारा मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाने जा रही एक महिला और उसकी बेटी को पुलिस द्वारा रास्ते में रोकने और कई घंटों तक थाने में बैठाए रखने के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। महिला ने पुलिस पर जबरन हिरासत में लेने, मारपीट करने और उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

महिला का कहना है कि मुख्यमंत्री से उसकी पूर्व में मुलाकात हुई थी, जिसके बाद उसे भोपाल बुलाकर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया गया था। उसका आरोप है कि कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद मामले में आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण वह बुधवार को मुख्यमंत्री के मानस भवन कार्यक्रम में अपनी बेटी के साथ दोबारा मिलने जा रही थी।

पीड़िता के अनुसार, सुबह से ही पुलिस उसके घर के बाहर निगरानी कर रही थी। वह जैसे ही घर से निकली, ब्यौहारबाग के पास पुलिस ने उसे रोक लिया और अपने साथ ले गई। महिला का आरोप है कि इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई तथा उसकी लोकेशन भी लगातार ट्रैक की जा रही थी।

महिला का दावा है कि उसे और उसकी बेटी को मदन महल थाना क्षेत्र स्थित आजाक थाने में देर शाम तक रखा गया।

महिला ने आरोप लगाया कि उन्हें ऐसे कमरे में बैठाया गया, जहां सीसीटीवी कैमरे भी नहीं थे। वहीं, घटना की जानकारी मिलने पर कवरेज के लिए पहुंचे एक पत्रकार को भी हिरासत में ले लिया तथा करीब दो घंटे तक थाने में रोककर रखने का आरोप लगाया गया है। बाद में पत्रकारों के विरोध के बाद पत्रकार को छोड़ दिया गया, जबकि महिला को देर शाम तक थाने में ही रखा गया।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया से बातचीत नहीं करने के बदले उसे प्रलोभन दिया गया, जिसे उसने अस्वीकार कर दिया।

घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि मुख्यमंत्री से मिलने जा रही एक शिकायतकर्ता को किस कानूनी आधार पर रोका गया और उसे कई घंटे तक थाने में क्यों रखा गया।

फिलहाल पुलिस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले में पुलिस का पक्ष और प्रशासन की आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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