जबलपुर : रिश्वतखोर पूर्व जूनियर इंजीनियर को 4 साल की सजा, लोकायुक्त ट्रैप मामले में कोर्ट का फैसला
जबलपुर, 29 जून (हि.स.)। विशेष न्यायाधीश (लोकायुक्त) मनीष सिंह ठाकुर की अदालत ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के तत्कालीन जूनियर इंजीनियर कमलेश कसेरा को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने यह फैसला सोमवार को सुनाया। मामले में लोकायुक्त की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने पैरवी की। अभियोजन के अनुसार, फरियादी सतीश चंद्र वंशकार ने 18 फरवरी 2021 को पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त जबलपुर से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि 15 फरवरी 2021 को प्रेम सागर फीडर के तत्कालीन अधिकारी कमलेश कसेरा ने उनके भाई के मकान में संचालित किराना दुकान की जांच कर बिजली चोरी का प्रकरण उनके पिता के नाम दर्ज किया था।
शिकायत के मुताबिक, बिजली चोरी का मामला समाप्त करने के बदले आरोपी ने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। इसमें से 5 हजार रुपये पहले ही ले लिए गए थे, जबकि शेष 5 हजार रुपये बाद में देने की बात तय हुई थी। शिकायत का सत्यापन करने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने 22 फरवरी 2021 को ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी कमलेश कसेरा को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जोन-2, कांचघर कार्यालय में 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
जांच के दौरान आरोपी के पर्स से रिश्वत की राशि बरामद हुई। वहीं, आरोपी के हाथ और पर्स को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलाने पर घोल गुलाबी हो गया। अदालत ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को विश्वसनीय मानते हुए कमलेश कसेरा को दोषी करार दिया और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

