नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार ने समझी उज्जैन के विकास की नीति

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नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार ने समझी उज्जैन के विकास की नीति


उज्जैन , 11 जनवरी (हि.स.)। रविवार को भारत के नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार एना रॉय मध्य प्रदेश के शहर उज्जैन आई। उन्होंने भगवान महाकालेश्वर के दर्शन किए। इसके बाद प्रशासनिक संकुल सभागृह में जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कूमट के साथ अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में उन्होंने उज्जैन क्षेत्र के विकास के नीति निर्धारण के संबंध में फिडबेक लेकर मार्गदर्शन दिया।

भारत सरकार के नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार एना रॉय ने रविवार को प्रशासनिक संकुल भवन सभाकक्ष में उज्जैन क्षेत्र के विकास के नीति निर्धारण के संबंध में बैठक ली। बैठक में जिला पंचायत सीईओश्रेयांस कूमट, एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय महाप्रबंधक राजेश राठौर, स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप शिवा, नीति आयोग के ईडी अभिलेश बाबेल, अपूर्व बंधोपाध्याय, अरुणव डे, कौस्तुभ श्रीवास्तव, असिथ प्रकाश, कुमार रत्न, प्रशंसा दीक्षित, निहारिका गुप्ता, दीपक राणा, सार्थक कुमार, अक्षत ठाकोर, मौदूद करीमी उपस्थित थे।

सुश्री रॉय ने उज्जैन क्षेत्र के विकास के संबंध में कहा कि क्षेत्र को विकास केंद्र के रुप में स्थापित करने के लिए वहां के शहरी क्षेत्रों का विकास होना बेहद जरूरी है। इसके लिए विधिवत कार्ययोजना बनाए जाने की आवश्यकता है। विकसित भारत के लिए अर्बन प्लानिंग के बारे में योजना बनाने की आवश्यकता है। समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए भी कार्ययोजना आ गई है। विकास के लिए विधिवत कार्ययोजना बनाने के साथ-साथ आर्थिक दृष्टिकोण का होना भी जरूरी है। उज्जैन को स्वतंत्र विकसित शहर बनाने के लिए कार्य करना होगा। आयोग द्वारा काफी समय से इस पर शोध किया गया है। इसके लिए बुनियादी दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है।

सुश्री रॉय ने कहा कि शहर प्लानिंग के साथ-साथ उद्योगों की स्थापना के लिए समन्वय के साथ कार्ययोजना बनाएं। शहर के विकास की आर्थिक गतिविधियों का होना बेहद जरुरी है। स्थानीय नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता और शहर की कनेक्टिविटी पर ध्यान देना होगा। इसके लिए यहां नियमित रुप से निवेश बहुत जरूरी है। अन्य क्षेत्रों से लोग आकर उज्जैन में निवास करें और स्थानीय लोग यहां से पलायन ना करें। इस बात पर विशेष फोकस करना होगा।

जिला पंचायत सीईओ श्री कूमट ने विभागवार उज्जैन विकास के लिए प्रगतिशील योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही सिंहस्थ महापर्व अंतर्गत किए जा रहे विकास कार्यों के बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 52 सडक़ें बनाई जा रही है। कुछ पुरानी सडक़ों का चौड़ीकरण कार्य किया जा रहा है तथा कुछ नए मार्ग बनाए जा रहे हैं। शिप्रा नदी के समानांतर एमआर 22 सडक़ निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह सडक़ शिप्रा नदी के पश्चिमी भाग पर सिंहस्थ बाईपास से मेला क्षेत्र को जोड़ते हुए नदी के किनारे स्थित मंदिरों और सभी घाटों को आपस में जोड़ेगी। सिंहस्थ के दौरान इस मार्ग का उपयोग बस, रेपीड ट्रांजिट के रुप में भी किया जा सकेगा। इस परियोजना से न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा होगी बल्कि यह क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

श्री कूमट ने 29 कि.मी. के नए घाट, कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना, वीर भारत संग्रहालय , उज्जैन के कुछ पुराने स्मारकों के विकास के बारे में जानकारी दी। सुश्री रॉय ने कहा कि शहर के विकास के लिए टूरिज्म और सांस्कृतिक गतिविधियों, औद्योगीकरण, कृषि तथा कृषि उत्पाद, डेरी प्रोडक्ट, होस्पिटेलीटी और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देना होगा। बैठक में बताया गया कि उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के अलावा मेडीसिटी, आईटी पार्क का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके अलावा जू और गीता भवन के निर्माण पर भी कार्य योजना बनाई जा रही है।

नीति आयोग के अभिलेश बाबेल ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में एआई तकनीक पर भी फोकस किया जाए। उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी अधिक से अधिक श्रद्धालु आए इस पर कार्ययोजना बनाएं। शहर की कनेक्टिविटी को विकसित किए जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाए। बैठक में एमपीआरडीसी, डब्ल्यूआरडी, एनएचएआई, रेल्वे, जल निगम के द्वारा संचालित प्रोजेक्ट के बारे में बताया गया।

एमपीआईडीसी के राजेश राठौर ने उज्जैन में औद्योगिक क्षेत्र के विकास के संबंध में जानकारी दी कि वर्तमान में उज्जैन जिले में लगभग 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश आया है। विक्रम उद्योगपुरी में कई उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। आने वाले समय में नागदा के पास कचनारिया में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। सुश्री रॉय ने कहा कि उज्जैन क्षेत्र में एग्रो प्रोसेसिंग उद्योग एवं रिसाइक्लिंग उद्योगों को विकसित करना होगा। उज्जैन के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर यहां उद्योगों का विकास करना होगा ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले साथ ही शहर के आस-पास से यहां काम के लिए आने वाले लोगों की आवासीय व्यवस्था और कनेक्टिविटी को बढ़ाए जाने पर जोर देना होगा।

शहर के मास्टर प्लान में औद्योगिक क्षेत्र के आस-पास के लोकल एरिया को भी शामिल करना होगा। उद्योगों में अक्षय उर्जा के स्त्रोतों को बढ़ाना होगा। प्रयास करने होंगे कि उज्जैन में पर्यटक प्रमुख मंदिरों के दर्शन के अलावा कुछ अन्य गतिविधियां भी करें। ताकि शहर का आर्थिक विकास हो। सिंहस्थ के बाद सामान्य दिनों में आने वाले टूरिस्ट के लिए कार्ययोजना बनाएं। उज्जैन में 100 एकड़ में टूरिज्म वेलनेस सिटी के रूप में विकसित किए जाने पर कार्ययोजना बनाएं। यहां होने वाले प्रमुख आयोजन और पर्वों पर अधारित एक केलेंडर बनाकर उसका प्रचार-प्रसार करें।

उज्जैन में जो मुख्य कृषि फसलें है उनकी प्रोसेसिंग इकाईयां भी यहीं पर बनाई जाए ताकि स्थानीय कृषकों की आय बढ़ सके और खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां निर्मित हों। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकेगा। बैठक में उज्जैन में स्वास्थ्य सेवाएं, पशुपालन एवं डेयरी उद्यानिकी के अंतर्गत दी जा रही सेवाओं और योजनाओं पर चर्चा की गई। तथा आने वाले समय में इनके विकास के लिए नीति निर्धारण पर विचार विमर्श किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल

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