अनूपपुर: सिर पर मंदिर रख नर्मदा परिक्रमा चार महीने की कठिन पदयात्रा करते अमरकंटक पहुंचे रहे प्रीतपाल

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अनूपपुर: सिर पर मंदिर रख नर्मदा परिक्रमा चार महीने की कठिन पदयात्रा करते अमरकंटक पहुंचे रहे प्रीतपाल


अनूपपुर, 03 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक नगरी अमरकंटक में एक अनोखी नर्मदा परिक्रमा यात्रा शुक्रवार को देखने को मिली। महाराष्ट्र के पुणे निवासी 40 वर्षीय प्रीतपाल मां नर्मदा की भक्ति में लीन सिर पर काष्ठ से निर्मित मंदिर रखकर पैदल ओंकारेश्वर से अपनी परिक्रमा यात्रा शुरू कर अमरकंटक पहुंचे।

पुणे निवासी प्रीतपाल इस विशेष मंदिर में त्रिदेव भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ मां नर्मदा की प्रतिमा विराजित कर अपने दैनिक उपयोग की सामग्री पीठ पर बैग में रखकर कठिन तपस्या और हठयोग के साथ यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने अपनी परिक्रमा यात्रा लगभग चार महीने की कठिन पदयात्रा के बाद अब आज अमरकंटक में माई की बगिया पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन, आरती एवं तट-जल परिवर्तन की प्रक्रिया पूर्ण की और मां नर्मदा के दक्षिण तट से अपनी आगे की यात्रा पुनः प्रारंभ कर दी है। प्रीतपाल एक हाथ में दंड और कमंडल धारण किए, हंसते-मुस्कुराते हुए भजन-कीर्तन करते निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। उनकी यह तपस्या, उत्साह और अटूट श्रद्धा मार्ग में मिलने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

प्रीतपाल ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 25 से 30 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हैं। यात्रा के दौरान खंभात की खाड़ी भी पार कर चुके हैं और अनुमान है कि परिक्रमा पूर्ण होने में अभी लगभग तीन माह का समय और लगेगा। उन्होंने बताया कि मां नर्मदा की कृपा से यात्रा के दौरान कभी कोई कमी महसूस नहीं होती। वे प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना करते हैं। “मां नर्मदा कभी भूखे नहीं सुलातीं, किसी न किसी रूप में सहायता मिल ही जाती है।”उन्होंने बताया कि नर्मदा परिक्रमा की प्रेरणा उन्हें अपने गांव के लोगों से मिली और यह उनके माता-पिता व पूर्वजों का आशीर्वाद है कि वे इस कठिन लेकिन पवित्र यात्रा को पूरा कर पा रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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