बुरहानपुर: आदिवासियों ने किया कलेक्टर कार्यालय का घेराव, वन विभाग पर लगाए जंगल बेचने के आरोप



- कहा-15 साल से वनाधिकार कानून पेटी में बंद करके रखा

- पट्टों के नाम पर आदिवासियों को लटकाकर रख रही सरकार

बुरहानपुर, 24 जनवरी (हि.स.)। वन विभाग वनों के संरक्षण के नाम पर भद्दा मजाक कर रहा है। एक तरफ वन अमला जंगल को कटवा रहा तो दूसरी ओर जिनका कानूनी हक है उनको प्रताड़ित किया जा रहा है।

यह आरोप आदिवासी नेता माधुरी बेन ने मंगलवार को जिलेभर के आदिवासियों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर किए गए घेराव के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कही। माधुरी बेन ने आरोप लगाए कि पिछले 15 साल से वनाधिकार कानून पेटी में बंद करके रखा गया है। वह पेटी कब खुलेगी। रामजी का वनवास 14 साल में खत्म हो गया था, लेकिन वनाधिकार कानून का वनवास अभी भी चालू है। जिले में 10 हजार दावे लंबित हैं। केवल 375 दावों का निराकरण हुआ है। अन्य दावों का सत्यापन नहीं हो रहा है। यह जान बूझकर किया जा रहा है। सरकार आदिवासियों को लटकाकर रखना चाह रही है ताकि पट्टों के नाम से चुनावी फायदा लिया जाए। जा सके। दूसरा खेल कंपनियों को जंगल दिए जाने का चल रहा है। पिछले साल जुलाई में यह निर्णय लिया गया है कि वन संरक्षण नियमों में जंगल हस्तांतरण करने से पहले दावों का निराकरण करना जरूरी नहीं होगा। न ही ग्राम सभा को पूछना होगा। यह दो शर्ते पहले थी। यह मामला संसद में लंबित है। सरकार ऐसा इसलिए कर रही है ताकि आदिवासियों पर हमेशा बेदखली की तलवार लटकाकर उनको एक वोट बैंक की तरह पट्टों के वादे से चुनाव जीते। आदिवासियों को अतिक्रामक बनाकर रखा जाए ताकि उनकी जमीन कंपनी, परियोजनाओं को दी जाए।

अस्पताल के पास जमा होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे

जिलेभर से अधिक आदिवासी अस्पताल के पास जमा हुए। यहां से कलेक्टर कार्यालय नारेबाजी करते हुए पहुंचे। आदिवासी नेता अंतराम अवासे ने कहा वन विभाग द्वारा ही जंगल को बेचा जा रहा है। आदिवासियों को उजाड़ा जा रहा है। सत्यापन प्रक्रिया होना चाहिए, ग्राम सभा होना चाहिए वह नहीं हो रही है। बिना दावेदारों को सूचना दिए दावे खारिज कर दिए गए हैं, लेकिन शासन प्रशासन चुप बैठा है। रतन अलावा ने कहा अभी भी प्रताड़ना और अत्याचार जारी है। नाकेदार के बल पर ग्राम सभा चल रही है। वन विभाग जंगल बेच रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार/निलेश जूनागढ़े

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