भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेई को जयस का कानूनी नोटिस, चुनावी गतिविधियों में पैसे मांगने संबंधी बयान पर आपत्ति

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भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेई को जयस का कानूनी नोटिस, चुनावी गतिविधियों में पैसे मांगने संबंधी बयान पर आपत्ति


भोपाल, 09 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेई के एक सोशल मीडिया पॉडकास्ट/वीडियो में दिए गए कथित बयान को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रपाल मरकाम की ओर से अधिवक्ता सम्यक जैन ने बुधवार को भाजपा प्रवक्ता हितेष बाजपेई को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में बयान को संगठन और उससे जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा व विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है।

नोटिस के मुताबिक, वीडियो में हितेश बाजपेई ने कथित तौर पर कहा था “हमारा आदमी चुनाव लड़ने जाता है, ये पैसे मांगने आ जाते हैं। हम यहां बैठ देंगे, यहां खड़ा कर देंगे, दलाली करने लग जाते हैं।” जयस ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे यह संदेश जाता है कि संगठन से जुड़े लोग चुनाव लड़ने वाले व्यक्तियों से पैसे मांगते हैं और राजनीतिक गतिविधियों में आर्थिक लेन-देन करते हैं।

आरोपों के आधार का उल्लेख नहीं होने का दावा

कानूनी नोटिस में कहा गया है कि कथित आरोपों के समर्थन में किसी विशिष्ट घटना, लेन-देन, दस्तावेज, शिकायत, जांच या न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं किया गया। संगठन का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी से उसकी सार्वजनिक छवि और सामाजिक-राजनीतिक विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। जयस नेता एवं विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने भी वीडियो जारी कर बयान पर विरोध जताया है। संगठन की ओर से कहा गया है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी संगठन या उसके सदस्यों पर सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यात्मक आधार होना चाहिए।

15 दिन में माफी और सामग्री हटाने की मांग

नोटिस में हितेश बाजपेई से 15 दिन के भीतर इंद्रपाल मरकाम और जयस से बिना शर्त लिखित माफी मांगने तथा कथित बयान वापस लेने की मांग की गई है। इसके साथ ही फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सार्वजनिक रूप से माफी और खंडन जारी करने तथा संबंधित वीडियो, पोस्ट और रील हटाने को कहा गया है।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में मांगों का पालन नहीं होने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत आपराधिक कार्रवाई और मानहानि के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया जा सकता है। इसमें क्षतिपूर्ति के साथ कथित आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग किए जाने की बात भी कही गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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