बीहर नदी का बहाव रोकना पड़ा महंगा, दो कॉलोनाइजरों पर एफआईआर के आदेश

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बीहर नदी का बहाव रोकना पड़ा महंगा, दो कॉलोनाइजरों पर एफआईआर के आदेश


रीवा, 25 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में बीहर नदी के प्राकृतिक बहाव को बाधित कर अवैध कॉलोनियां विकसित करना दो कॉलोनाइजरों को भारी पड़ गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर न्यायालय से जारी आदेशों के अनुसार एसडीएम हुजूर को मेसर्स शांति इंफ्रास्ट्रक्चर एवं शांति विलास इंफ्रा प्रोजेक्ट के संचालक उपेन्द्र सिंह के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा गया है। वहीं करहिया क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग करने पर शाहीन बेगम, उनके पति मोहम्मद शहीद अंसारी और अमरीन अंसारी के खिलाफ भी आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में सामने आया कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और कॉलोनाइजर लाइसेंस के कॉलोनियों का निर्माण किया जा रहा था। साथ ही बीहर नदी के बाएं तट पर मिट्टी और मलबा डालकर उसके प्राकृतिक अपवाह क्षेत्र को बाधित करने का प्रयास किया गया, जो कि एनजीटी के मानकों के विपरीत है।

नदी-नालों का स्वरूप बदला, अवैध कॉलोनी शासन के अधीन होगी

प्रशासनिक जांच में यह भी पाया गया कि उपेन्द्र सिंह द्वारा शांति रायल स्टेट कॉलोनी विकसित करने के लिए न तो वैध लाइसेंस लिया गया और न ही आवश्यक अनुमति। ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर कॉलोनी विकसित की गई, जबकि कॉलोनी विकास नियम 2014 के तहत अनुमति देने का अधिकार केवल कलेक्टर को है। इसके अलावा मढ़ी और करहिया के नालों को संकरा कर उनके स्वरूप में भी बदलाव किया गया। नियमों के अनुसार अवैध रूप से विकसित कॉलोनी को शासन अपने अधीन ले सकता है। इसी के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग, सेटेलाइट जांच में खुलासा

शाहीन बेगम और अमरीन अंसारी द्वारा करहिया में कृषि भूमि पर अवैध रूप से प्लाटिंग कर कॉलोनी बसाई जा रही थी। जांच के दौरान सेटेलाइट इमेज में संबंधित भूमि पर निर्माण कार्य पाया गया, जबकि दस्तावेजों में इसे कृषि भूमि बताया गया था।

दोष सिद्ध होने पर जेल की सजा संभव

भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 के तहत दोषी पाए जाने पर संबंधित कॉलोनाइजरों को तीन से सात वर्ष तक का कारावास और 10 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

मामले की विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसमें एसडीएम हुजूर सहित नगर एवं ग्राम निवेश तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारी शामिल हैं। समिति को एक माह में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही तहसीलदार हुजूर को तीन दिन में भू-अभिलेख अद्यतन करने और एक सप्ताह में कब्जा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी

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