भोपाल में टीईटी अनिवार्यता समेत 3 मांगों को लेकर आंदोलन, रीवा-शहडोल संभाग के शिक्षक पहुंचे नीलम पार्क

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भोपाल में टीईटी अनिवार्यता समेत 3 मांगों को लेकर आंदोलन, रीवा-शहडोल संभाग के शिक्षक पहुंचे नीलम पार्क


भोपाल, 01 अक्टूबर (हि.स.)। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता सहित तीन मांगों को लेकर अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा का भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। गुरुवार को रीवा और शहडोल संभाग के शिक्षक धरने में शामिल हुए। अलग-अलग संभागों के शिक्षकों की चरणबद्ध भागीदारी के साथ आंदोलन आगे बढ़ाया जा रहा है।

मोर्चा ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर उपवास-सत्याग्रह करने की घोषणा की है। शिक्षकों के अनुसार गांधी प्रतिमाओं के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर संबंधित अधिकारियों को मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा। नीलम पार्क में भी शिक्षकों के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होकर मांगों को लेकर सरकार से संवाद की मांग कर रहे हैं।

सरकार से संवाद और टीईटी पर निर्णय की मांग

शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की है। मोर्चा इसके लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग भी कर रहा है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटीकी अनिवार्यता पर सरकार को उनकी स्थिति पर विचार करना चाहिए।

मोर्चा सदस्य एवं शिक्षक नेता उपेंद्र कौशल ने कहा कि 2 अक्टूबर का उपवास-सत्याग्रह लंबित मांगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने प्रदेश के शिक्षकों से इसमें शामिल होने की अपील की।

तीन प्रमुख मांगें

टीईटी की अनिवार्यता समाप्त हो: सेवारत शिक्षकों को टीईटीसे मुक्त करने की मांग। इसके लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की मांग भी रखी गई है।

पहली नियुक्ति से सेवा गणना: शिक्षकों की सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना प्रथम नियुक्ति की तारीख से करने की मांग है। मोर्चे का कहना है कि इससे संबंधित सेवा और सेवानिवृत्ति लाभों में भी इसका असर पड़ेगा।

ई-अटेंडेंस में बदलाव: शिक्षकों के विभागीय और अन्य शासकीय दायित्वों को देखते हुए ई-अटेंडेंस व्यवस्था को समाप्त अथवा स्वैच्छिक करने की मांग की जा रही है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरने के दौरान एक शिक्षक नेता ने मांगों पर निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी मंगल पांडे का उदाहरण देते हुए कर्मचारियों के संघर्ष का उल्लेख किया। यह बयान शिक्षक नेता की ओर से दिया गया है।

मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि मांगों के समाधान के लिए आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाकर तीनों मांगों पर सकारात्मक पहल करने की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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