गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


- प्रशासन अकादमी में हुआ राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह

- राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान

भोपाल, 05 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर हैं। गुरुजन नि:संदेह विशेष भी है और हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परम्पराओं का विशेषण भी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में देश का मान निरंतर बढ़ रहा है। इसके पीछे गुरु की महिमा है, क्योंकि जहां गुरूर खत्म होता है, और गुण शुरू होता है, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि होती है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुजन एक दीपक की तरह स्वयं अंधेरे में रहकर अपने विद्यार्थियों को शिक्षित कर उनका पूरा जीवन-चरित्र आलोकित करते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को शिक्षक दिवस पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में हुए राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान राज्यपाल पटेल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस दुनिया में माता-पिता के बाद वो शिक्षक ही हैं, जो यह कामना करते हैं कि आप वह बनें, जो आप वास्तव में बनना चाहते हैं। आपको वह सब मिले, जो आप पाना चाहते हैं। इसीलिए गुरुजन सदैव वंदनीय हैं, पूजनीय हैं। इनका सदैव आदर-सम्मान और सत्कार करना हम सबका कर्तव्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षकों के इस सम्मान समारोह में घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के जिन वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी की परीक्षा देनी है और जिन्हें ऐसी ज़रूरत है, उन्हें ऑफलाइन टीईटी परीक्षा दिलाने के प्रयास और प्रबंध किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की गौरवशाली गुरुकुल और गुरु-शिष्य परंपरा दुनिया में सबसे प्राचीन है। भारत की मंशा कभी किसी देश को अधीन करने की नहीं रही। हम वसुधैब कुटुम्बकम की भावना से मानवता को बढ़ाने के लिए कार्य करते आए हैं। प्राचीन काल में भारत ने तक्षशिला, नालंदा और विक्रमजीत शिला विश्वविद्यालयों के माध्यम से दुनियाभर के विद्यार्थियों को शिक्षित किया। वर्तमान समय ऐसा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत शांति और स्थिरता के साथ सुदृढ़ अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और दुनिया भारत की ओर बड़ी आशा के साथ देख रही है। आजादी के बाद भारत ने गुट निरपेक्ष नीति अपनाई थी और वह समय आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के अलग-अलग शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों से पूरे सम्मान के साथ मुलाकात और चर्चा करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का नक्शा कागजों पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत हमारे गुरुजन कक्षाओं में बनाते हैं। हमारे शिक्षक और गुरुजन इन कक्षाओं के अधिपति हैं। शिक्षक कई पीढ़ियों तक अपने शिष्य की प्रगति से आनंदित होता है। उसे जीवन में सबसे अधिक गर्व तब महसूस होता है, जब वो शिष्य को स्वयं से आगे बढ़ते हुए देखता है। मध्यप्रदेश सरकार सभी शिक्षकों की मेहनत का सम्मान करती है। जब बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम सामने आते हैं तो इनकी मेरिट लिस्ट में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे हमारे शासकीय स्कूलों के होते हैं, जो शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिश्रम के कारण वहां तक पहुंच पाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार शिक्षकों के लिए जो बेहतर हो सकता है, ऐसे सभी जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही टीईटी की परीक्षा ऑफलाइन मोड पर होगी। शिक्षा विभाग के आधार पर शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। हमारे शासकीय स्कूल, प्राइवेट स्कूलों से बेहतर होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ऐसी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण स्वयं शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। जहां उन्होंने 64 कलाएं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि ने अपने शिष्य को जगद्गुरु की उपाधि दी। उन्होंने अपने शिष्य में भविष्य का पुरुषार्थ और पराक्रम देख लिया था। इसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने बाल्यकाल में प्रभु श्रीराम और उनके भाइयों में पराक्रम देखा था। वे राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए और श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनाया।

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस को पूरा देश गुरुजनों के सम्मान के रूप में देखता है। भविष्य में हमारी युवा पीढ़ी अगर देश को आगे बढ़ाएगी तो इसमें हमारे अभिभावकों और गुरुजनों का विशेष योगदान होगा। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में देश की शिक्षण पद्धति की चुनौतियां खत्म हो रही हैं। देश में शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। मध्यप्रदेश में यह सबसे पहले उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लागू करवाई थी। आज का दिन शिक्षकों के प्रति हमारी कृतज्ञता प्रकट करने का है। राज्य सरकार अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान कर रही है। प्रदेश का हर शिक्षक हमारी शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है। नक्सल प्रभावित रहे बालाघाट जिले में शिक्षकों ने स्कूलों के माध्यम से बच्चों को अच्छे संस्कार दिए। कई शिक्षक ऐसे हैं, जो अपने वेतन की हिस्सेदारी भी स्कूल को आदर्श विद्यालय बनाने में लगा देते हैं। बच्चों को स्वयं साइकिल की घंटी बजाकर स्कूल आने के लिए प्रेरित करते हैं। हमारी सरकार कानूनी बाधाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए शिक्षकों की बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। विकसित भारत @2047 के संकल्प की पूर्ति में सभी शिक्षकगणों का अहम योगदान होगा।

कार्यक्रम में जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुर्नवास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, विधायक भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह, स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, सम्मानित शिक्षकगण एवं उनके परिजन भी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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