भोपाल में राजा हिरदे शाह लोधी की शौर्य यात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री, कहा- जीवन महान कार्यों के लिए समर्पित करें
उमा भारती बाेली, “आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता”
भोपाल, 28 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश अब राजा हिरदेशाह लोधी के बारे में न केवल पढ़ेगा, बल्कि उनकी जीवन यात्रा भी देखेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजा हिरदेशाह लोधी को पाठ्यक्रम में शामिल कराएंगे और उनके नाम से तीर्थ स्थल का भी निर्माण कराएंगे।
मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल के जंबूरी मैदान में मंगलवार काे आयोजित हुईराजा हिरदे शाह लोधी की शौर्य यात्रा के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डाॅ. माेहन यादव ने यह ऐलान किया है। उन्हाेंने समाज को बड़े लक्ष्यों के लिए समर्पित होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन एक बार मिलता है और इसे महान कार्यों के लिए समर्पित करना चाहिए। मुख्यमंत्री डाॅ. यादव ने राजा हिरदे शाह के साहस और योगदान को याद करते हुए कहा कि ऐसे महापुरुषों के कारण ही समाज गर्व से सिर उठाकर चलता है।
मुख्यमंत्री डाॅ.यादव ने कहा कि आज का यह दिन पवित्र दिन है। कई योनियों के बाद मनुष्य जन्म मुश्किल से मिलता है। नर्मदा टाइगर के नाम से पहचान रखने वाले राजा हिरदेशाह ने अंग्रेज शासन के खिलाफ 1842 में संघर्ष का संकल्प लिया। वे अपने भाइयों के साथ 1858 तक संघर्ष करते रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजा हिरदेशाह का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी और आदर्श है। समाज के महापुरुषों के संघर्ष को भी याद करने की आवश्यकता है। जो संघर्षों से लड़ना जानता है, समाज उसका अभिनंदन करता है। राजा हिरदेशाह ने बुंलेदखंड के बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट कर अंग्रेजों के समाने आंदोलन शुरू किया था। राज्य सरकार उनके संघर्ष पर शोध कराएगी। उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रम को लिपिबद्ध कर शिक्षा विभाग में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। राज्य सरकार ने प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों का सम्मान करते हुए सबसे पहले रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की। रानी अवंतीबाई का योगदान 1857 की क्रांति में सबसे बड़ा है।
संस्कृति को सहेज रही राज्य सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सनातन संस्कृति के सभी तीज-त्योहार धूमधाम से मना रही है। राज्य सरकार ने किसान भाई-बहनों के कल्याण के लिए कृषक कल्याण वर्ष मनाने की पहल की है। नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा। इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ फिर से खुलने चाहिए। महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी शोध संस्थान बनाया गया है। प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए संकल्पित है। इसीलिए प्रत्येक नगरीय निकाय में सर्व सुविधायुक्त भव्य गीता भवन बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी जनपदों में एक-एक वृंदावन ग्राम भी तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि संघर्षों से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ें। डॉ. यादव ने उमा भारती और प्रह्लाद पटेल के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को संघर्षों से घबराना नहीं चाहिए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का पारंपरिक रूप से स्वागत भी किया गया। मुख्यमंत्री का गदा भेंट कर स्वागत किया गया और राजा हिरदेशाह लोधी के शौर्य की मशाल भेंट की गई।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग भीषण गर्मी के बावजूद शामिल हुए। मंच से सामाजिक एकता, इतिहास और समानता के मुद्दों पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान एक सुरक्षाकर्मी की तबीयत गर्मी के कारण बिगड़ गई, जिसे तत्काल संभाला गया।
उमा भारती का आरक्षण पर तीखा बयान
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “जब तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस के परिवार के लोग सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता।” उमा भारती ने कहा कि भारतीय समाज लंबे समय तक जातिगत असमानता और आर्थिक विषमता से जूझता रहा है। ऐसे में आरक्षण सामाजिक बराबरी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर दिया कि समानता केवल कानून से नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव से आएगी। उमा ने कहा- लोधी समाज की संख्या काफी अधिक है और उनकी भागीदारी से सरकारें बनती हैं। यह समाज सरकार बनाने की ताकत रखता है। उमा भारती ने अपने भाषण के अंत में कहा कि देश ने आजादी की दो बड़ी लड़ाइयां लड़ी हैं, अब तीसरी लड़ाई सामाजिक समानता और अधिकारों की होनी चाहिए। उन्होंने समाज से अपील की कि वह भेदभाव खत्म कर समावेशी सोच अपनाए।
प्रह्लाद पटेल का संदेश—संस्कार और धैर्य जरूरी
कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने अपने संबोधन में समाज को आत्ममंथन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अभिभावक अपने बच्चों पर भरोसा कर पा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन में वही बात कहनी चाहिए, जिसे खुद जिया हो। पटेल ने स्पष्ट कहा कि उन्हें न धन की चाह है और न पद की, लेकिन जीवन में किसी भी प्रकार का कलंक स्वीकार नहीं है। उन्होंने समाज को धैर्य रखने की सलाह देते हुए कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए समय और संयम जरूरी है—सिर्फ कुछ पद हासिल कर लेना ही सफलता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन उसका सही दिशा में उपयोग होना चाहिए। साथ ही, आजादी की लड़ाई लड़ने वाले वीरों के वंशजों की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

