भोपाल: पंचायत कार्यालय पर सचिव ने लगाया ताला, सरपंच बाहर बैठे, अगरिया पंचायत में सरपंच और ग्रामीणों का प्रदर्शन

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भोपाल: पंचायत कार्यालय पर सचिव ने लगाया ताला, सरपंच बाहर बैठे, अगरिया पंचायत में सरपंच और ग्रामीणों का प्रदर्शन


भोपाल, 06 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल के फंदा जनपद की अगरिया पंचायत में मंगलवार को पंचायत कार्यालय के बाहर सरपंच और ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। पंचायत कार्यालय के गेट पर ताला लगा था और सरपंच सुनील मालवीय ग्रामीणों के साथ परिसर में बैठकर उनकी समस्याएं सुनते रहे।

सरपंच ने पंचायत सचिव हेमसिंह राजपूत पर कार्यालय में लंबे समय से ताला लगाए रखने और पंचायत का कामकाज प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं। अगरिया पंचायत बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में आती है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सचिव के खिलाफ नारेबाजी की और पंचायत कार्यालय नियमित रूप से खोलने की मांग की।

सरपंच सुनील मालवीय ने आरोप लगाया कि वे अनुसूचित जाति वर्ग से हैं और पंचायत सचिव उन्हें कार्यालय में प्रवेश नहीं करने देते। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर पंचायत कार्यालय बंद मिला है। राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त और 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर भी सचिव के कार्यालय नहीं आने का आरोप लगाया। सरपंच के मुताबिक, मंगलवार को भी पंचायत कार्यालय पर ताला लगा था। ऐसे में ग्रामीणों की समस्याएं पंचायत परिसर में ही सुनी गईं।

तीन महीने तक कार्यालय बंद रहने का आरोप

सरपंच ने आरोप लगाया कि सचिव कई बार लगातार तीन-तीन महीने तक पंचायत कार्यालय नहीं खोलते और पंचायत में उपस्थित नहीं रहते। इस संबंध में भोपाल संभागायुक्त, कलेक्टर, जिला पंचायत और जनपद पंचायत सीईओ को शिकायत की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि सचिव का कुछ समय पहले तबादला हुआ था, लेकिन कोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बाद वे दोबारा पंचायत में पदस्थ हो गए।

पेंशन और आवास की राशि नहीं मिलने की शिकायत

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें पिछले करीब छह महीने से वृद्धावस्था और विधवा पेंशन सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, मजदूरी का भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त, कुएं की दूसरी किस्त और नए आवास से संबंधित राशि भी लंबित है। ग्रामीणों ने सचिव की उपस्थिति और वेतन भुगतान की भी जांच कराने की मांग की है। सरपंच और ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री और पंचायत विभाग के अधिकारियों से शिकायत की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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