भोपाल में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों का उग्र प्रदर्शन, ‘न्याय यात्रा’ रोकी गई, महिला कर्मचारी बेहोश, गेट पर पुलिस से धक्का-मुक्की
भोपाल, 25 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार को जयप्रकाश जिला अस्पताल (जेपी अस्पताल) परिसर आंदोलन का केंद्र बन गया। यहां नियमितीकरण सहित नौ सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर से आए आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर जुटे कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए ‘न्याय यात्रा’ निकालने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने परिसर के बाहर ही रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान धार जिले से आई महिला कर्मचारी मीना परमार अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। वे अपने ढाई साल के बच्चे के साथ आंदोलन में शामिल होने पहुंची थीं। साथी कर्मचारियों ने उन्हें संभाला और अस्पताल परिसर में प्राथमिक सहायता दी।
प्रदर्शनकारी संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय से मुख्यमंत्री आवास तक न्याय यात्रा निकालना चाहते थे, ताकि अपनी मांगें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा सकें। हालांकि प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। जेपी अस्पताल के मुख्य द्वार पर भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी गई और सभी रास्ते बंद कर दिए गए। पुलिस और कर्मचारियों के बीच गेट पर धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। कर्मचारियों ने जमीन पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी और स्पष्ट किया कि जब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी आकर उनसे चर्चा नहीं करेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कई संगठनों का मिला समर्थन
प्रदर्शन में एड्स कंट्रोल एम्पलाइज यूनियन, संयुक्त डेंगू-मलेरिया कर्मचारी संघ, समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ, संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ और नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल हुए। समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने बताया कि 2 फरवरी से संविदा कर्मचारी लगातार आंदोलनरत हैं। पिछले दो दिनों से वे काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे थे, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया।
क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मियों को बिना शर्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। इसके अलावा वे उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर स्थायी नीति बनाने, न्यूनतम 21 हजार रुपए मासिक वेतन तय करने और ठोस सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
नौ सूत्रीय मांगों में शामिल हैं:
1 अप्रैल 2024 से लागू वेतन वृद्धि का 11 माह का एरियर भुगतान
निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर सीधे कर्मचारियों के खातों में वेतन भुगतान
शासकीय अवकाश की सुविधा
नियमित भर्ती में 50% आरक्षण
स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ
कर्मचारियों का आरोप है कि दोहरी और दमनकारी नीतियों के कारण वर्षों से उनका शोषण हो रहा है, जबकि वे 12 से 14 घंटे तक कार्य कर अस्पताल व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं।
प्रशासन का पक्ष
पुलिस का कहना है कि विधानसभा सत्र के चलते किसी भी प्रकार की रैली या प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे ज्ञापन सौंपकर शांतिपूर्वक लौट जाएं। फिलहाल जेपी अस्पताल परिसर के मुख्य द्वार पर पुलिस बल और प्रदर्शनकारी आमने-सामने डटे हुए हैं, जिससे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

