भोपाल में जयस प्रदर्शन के दौरान हंगामा, महिला कार्यकर्ता ने कांस्टेबल को थप्पड़ मारा
भोपाल, 18 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर रविवार को अंबेडकर मैदान में जुटे जयस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान हंगामा हो गया।
मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने प्रकाश तरुण पुष्कर के सामने बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश की। इस दौरान विवाद बढ़ गया और जयस की कार्यकर्ता बताई जा रही एक युवती ने एक कांस्टेबल को थप्पड़ मार दिया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झूमाझटकी भी हुई। मौके पर काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में जयस कार्यकर्ता शामिल हुए। उनकी मांग थी कि आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता और गाली-गलौज के मामले में टीआई रतन सिंह परिहार के खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम (एट्रोसिटी एक्ट) के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि केवल निलंबन पर्याप्त कार्रवाई नहीं है, मामले में कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान जयस कार्यकर्ताओं ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास है और कार्रवाई की जिम्मेदारी सरकार की है। उनका आरोप था कि प्रदेश में आदिवासियों के साथ अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं और संगठन उनके अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है। एक कार्यकर्ता ने कहा, “हमको आज एफआईआर चाहिए उस व्यक्ति की, जिसने गाली-गलौज किया।” कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि संबंधित टीआई को निलंबित करने के बाद अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई। उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
एसीपी बोले- जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी कार्रवाई
प्रदर्शन को लेकर एसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एक अधिकारी द्वारा अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया था। मामला संज्ञान में आने के बाद संबंधित अधिकारी को निलंबित कर प्राथमिक जांच के आदेश दिए गए थे।
उन्होंने बताया कि इस मामले में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्हें आश्वस्त किया गया था कि जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। चौहान के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जयस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई झूमाझटकी के संबंध में एसीपी ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता प्रदर्शन को समाप्त कराने और व्यवस्था सुचारू बनाए रखने की है। उन्होंने कहा कि झड़प या अन्य घटनाक्रम से जुड़े तथ्य सामने आने पर उन्हें संज्ञान में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
‘जय जोहार’ पर टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार से जुड़ा है। 13 अक्टूबर को आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ बोलने पर टीआई पर अभद्र टिप्पणी और गाली-गलौज करने के आरोप लगे थे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद आदिवासी संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों से चर्चा की थी। इसके बाद 14 अक्टूबर को टीआई रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया था। पुलिस कमिश्नर ने उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए थे।
एट्रोसिटी एक्ट में एफआईआर की मांग
जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा ने टीआई के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने और उनकी सेवा समाप्त करने की मांग की थी। संगठन की ओर से पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी कही गई थी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी घटना को गंभीर बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। वहीं, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा था कि संबंधित टीआई को निलंबित कर जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में अन्य लोग भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

