भोपाल: नियुक्ति की मांग को लेकर डीपीआई का घेराव, चयनित अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन

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भोपाल: नियुक्ति की मांग को लेकर डीपीआई का घेराव, चयनित अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन


भोपाल, 16 जून (हि.स.)। प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही शिक्षा व्यवस्था का एक बड़ा विरोधाभास राजधानी भोपाल में देखने को मिला। एक ओर सरकारी स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल लौट आई, वहीं दूसरी ओर नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हजारों चयनित शिक्षक लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के बाहर धरने पर बैठ गए। माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-2) भर्ती 2024 के चयनित अभ्यर्थियों ने मंगलवार को अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि चॉइस फिलिंग प्रक्रिया पूरी हुए छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के हर चरण में उन्हें संघर्ष करना पड़ा और अब चयनित होने के बाद भी नौकरी के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।

9-10 बार भोपाल आ चुके, हर बार मिला सिर्फ आश्वासन

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने कहा कि वे पिछले कई महीनों में 9 से 10 बार भोपाल आ चुके हैं। शिक्षा मंत्री सहित विभागीय अधिकारियों से कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अभ्यर्थियों का आरोप है कि शिक्षा मंत्री ने स्वयं आश्वासन दिया था कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी, लेकिन सत्र शुरू होने के बावजूद नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुए। एक अभ्यर्थी ने कहा, हमें कहा गया था कि स्कूल खुलने से पहले जॉइनिंग मिल जाएगी, लेकिन आज हम स्कूलों में पढ़ाने के बजाय सड़क पर बैठकर अपनी नौकरी मांग रहे हैं।

शहडोल से आए चयनित अभ्यर्थी सलमान ने बताया कि चयन सूची जारी होने और सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने से वे सामाजिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, लोग लगातार पूछते हैं कि नौकरी कब ज्वाइन कर रहे हो। कई लोग तो यह तक कहने लगे हैं कि हम झूठ बोल रहे हैं। इस स्थिति ने हमें मानसिक रूप से परेशान कर दिया है।

टीकमगढ़ के रमाकांत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को चार साल से अधिक समय हो चुका है। परीक्षा, परिणाम और चयन तक के हर चरण में अभ्यर्थियों को आंदोलन करना पड़ा। हर सप्ताह हमें सिर्फ आश्वासन मिलता है। अब कई अभ्यर्थी यह तय करके आए हैं कि जब तक नियुक्ति नहीं होगी, तब तक भोपाल से वापस नहीं लौटेंगे।

महिला अभ्यर्थी बच्चों के साथ पहुंचीं धरना स्थल

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थी भी मौजूद रहीं। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर आंदोलन में शामिल हुईं। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत और चयन के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने से परिवारों पर आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ता जा रहा है। चयनित शिक्षिका सिमरन ने कहा कि परीक्षा दिए चार साल बीत चुके हैं और परिणाम आए भी एक वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन नियुक्ति का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश के स्कूलों में नया सत्र शुरू हो चुका है और शिक्षकों की भारी कमी है, तो नियुक्ति प्रक्रिया में देरी क्यों की जा रही है?

1,895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं

शिक्षा विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। वहीं 29 हजार से अधिक स्कूलों में लगभग एक लाख शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्कूल एक या दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि जब स्कूलों में शिक्षकों की आवश्यकता है, तब नियुक्तियां लंबित रखना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

चार साल से चल रही भर्ती प्रक्रिया

माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। पात्रता परीक्षा, चयन परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। सितंबर 2025 में परिणाम घोषित होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि जल्द नियुक्ति मिल जाएगी, लेकिन महीनों बाद भी आदेश जारी नहीं हुए। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती नियमों के अनुसार चयन सूची जारी होने के बाद निर्धारित समय सीमा में नियुक्ति दी जानी चाहिए थी, लेकिन विभागीय स्तर पर लगातार देरी हो रही है।

जॉइनिंग नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा

प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और लंबी चयन प्रक्रिया के बाद सफलता हासिल की है और अब केवल नियुक्ति चाहते हैं, किसी प्रकार का विशेष लाभ नहीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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