मप्रः भोजशाला पर हाई कोर्ट में चली दो घंटे चली सुनवाई, हिंदू पक्ष ने दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी के कालखंड का उल्लेख किया

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मप्रः भोजशाला पर हाई कोर्ट में चली दो घंटे चली सुनवाई, हिंदू पक्ष ने दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी के कालखंड का उल्लेख किया


मप्रः भोजशाला पर हाई कोर्ट में चली दो घंटे चली सुनवाई, हिंदू पक्ष ने दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी के कालखंड का उल्लेख किया


धार, 06 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद और लेकर इंदौर हाई कोर्ट में एक बार फिर सोमवार को सुनवाई हुई, जिसमे करीब 2 घंटे तक इस संवेदनशील मामले में विस्तार से सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत में इतिहास, पुरातात्विक साक्ष्य और प्रशासनिक दस्तावेजों को लेकर दोनों पक्षों की ओर से गहन बहस देखने को मिली। हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। उन्होंने भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप को विस्तार से बताते हुए अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए।

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने विशेष रूप से दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी के कालखंड का उल्लेख करते हुए यह बताने की कोशिश की कि उस समय भोजशाला का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या था। इसके साथ ही ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों के आधार पर यह दावा किया गया कि यह स्थल प्राचीन समय से ही हिंदू आस्था से जुड़ा रहा है।

इसके अलावा वर्ष 1935 में भोजशाला परिसर में लगाए गए एक बोर्ड को भी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। हिंदू पक्ष ने इस बोर्ड को साक्ष्य के रूप में पेश करते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि उस समय प्रशासनिक स्तर पर भी इस स्थल की पहचान को लेकर स्पष्ट संकेत मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Gyanendra Tripathi

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