मंदसौरः पुत्र-पुत्रियों के करियर की नहीं, संस्कार की चिन्ता करो - पवित्ररत्नविजय महाराज

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मंदसौरः पुत्र-पुत्रियों के करियर की नहीं, संस्कार की चिन्ता करो - पवित्ररत्नविजय महाराज


मंदसौर, 27 सितंबर (हि.स.)। वर्तमान समय में माता-पिता, पुत्र-पुत्रियों के करियर को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं। 30-32 वर्ष की आयु तक की युवतियां विवाह नहीं कर रही हैं तथा करियर की चिन्ता कर रही हैं जिसके कारण पुत्र-पुत्रियों के विवाह समय पर नहीं हो रहे हैं। पुत्र उच्च शिक्षित होने के बाद घर-परिवार का परंपरागत व्यवसाय करने की बजाय दूसरों की नौकरी करना चाह रहा है। पुत्र-पुत्रियों के ऐसे क्रियाकलापों से माता-पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है लेकिन माता-पिता को विचार करना चाहिये कि ऐसी परिस्थिति क्यों निर्मित हो रही है? आखिर कहीं संस्कारों की कमी तो इसका कारण नहीं है?

उक्त उद्गार परम पूज्य जैन संत मुनिराज पवित्ररत्नविजयजी म.सा. ने प्रत्यक्ष रत्नविजयजी म.सा. की पावन उपस्थिति में आयोजित धर्मसभा व्याख्यान में कहे। उन्होंने राजेन्द्र विलास जीवागंज में रविवार को आयोजित धर्मसभा में कहा कि घर-परिवार का अच्छा व्यापार-व्यवसाय है तो पुत्र-पुत्री को बड़े महानगरों में जाकर दूसरों की नौकरी करने को अपना करियर नहीं समझना चाहिये बल्कि उसी व्यापार-व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहिये। पुत्री का विवाह समय पर हो जाये यह सभी माता-पिता की इच्छा होती है लेकिन करियर का बहाना बनाकर यदि पुत्री समय पर विवाह नहीं करती है तो आगे जाकर घर-परिवार में समस्याये बढ़ती हैं।

दादा गुरुदेव को समर्पित दिव्य दीपक एकासना आराधना का हुआ आयोजन

पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेनसूरीश्वरजी महाराजा के शिष्यरत्न, द्विशतावधानी मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. की पावन निश्रा में मंदसौर नगर में दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी महाराजा को समर्पित एक अद्भुत एवं भावपूर्ण दीपक एकासने का आयोजन रविवार को किया गया जिसमें 70 से अधिक आराधकों ने एकासने किये। यह अनूठी आराधना 'प्रवचन सारोद्धार' ग्रंथ में वर्णित विधि के अनुसार संपन्न हुई। इसमें साधक दीपक प्रज्वलित रहने तक एकासना प्रारंभ नहीं कर सकते थे दीपक की लौ के शांत होने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कि और उसके शांत होने के पश्चात ही एकासना प्रारंभ हुई जिसमें सिर्फ एक बार ही भोजन थाली में ले सकते थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया

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