दमोह : बांदकपुर कॉरिडोर के सामने भूमि संकट, अतिक्रमण और पट्टा विवाद बने बड़ी बाधा

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दमोह : बांदकपुर कॉरिडोर के सामने भूमि संकट, अतिक्रमण और पट्टा विवाद बने बड़ी बाधा


दमोह : बांदकपुर कॉरिडोर के सामने भूमि संकट, अतिक्रमण और पट्टा विवाद बने बड़ी बाधा


दमोह : बांदकपुर कॉरिडोर के सामने भूमि संकट, अतिक्रमण और पट्टा विवाद बने बड़ी बाधा


दमोह : बांदकपुर कॉरिडोर के सामने भूमि संकट, अतिक्रमण और पट्टा विवाद बने बड़ी बाधा


दमोह : बांदकपुर कॉरिडोर के सामने भूमि संकट, अतिक्रमण और पट्टा विवाद बने बड़ी बाधा


दमोह, 05 जून (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के दमोह जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जागेश्वरनाथ धाम बांदकपुर में प्रस्तावित 100 करोड़ रुपये की कॉरिडोर परियोजना भूमि उपलब्धता और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही है। 61 एकड़ क्षेत्र में पांच चरणों में विकसित होने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का पहला चरण शुरू हो चुका है, लेकिन आवश्यक भूमि नहीं मिलने से परियोजना की रफ्तार प्रभावित होने लगी है।

पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयासों में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर, परियोजना क्षेत्र में वर्षों से निवास और व्यवसाय कर रहे लोगों द्वारा भूमि के पट्टे देने की मांग ने मामले को और जटिल बना दिया है।

मंदिर ट्रस्ट कमेटी के सचिव पंकज हर्ष श्रीवास्तव के अनुसार कॉरिडोर निर्माण के लिए आवश्यक भूमि का चिन्हांकन किया जा चुका है। मंदिर परिसर से लगे क्षेत्रों में कब्जाधारियों और किरायेदारों को भूमि खाली करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। उनका कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

राजस्व अभिलेखों के अनुसार खसरा नंबर 180/1/2 सहित कुछ भूमि मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज है। वर्ष 2020 में भी इन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई थी और कई लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, हालांकि कई मामले अभी भी लंबित हैं।

राजस्व अधिकारियों का कहना है कि बांदकपुर विकास परियोजना को ध्यान में रखते हुए संबंधित क्षेत्र में फिलहाल पट्टा वितरण पर रोक लगाई गई है। हाल के दिनों में स्थानीय नागरिकों के एक समूह ने भूमि के पट्टों की मांग को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। इसके बाद परियोजना क्षेत्र में भूमि अधिकारों और विकास कार्यों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष पट्टा वितरण का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि इससे भविष्य में कॉरिडोर परियोजना के विस्तार में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।

परियोजना के प्रारूप में मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार और उसके आसपास लगभग 100 मीटर क्षेत्र के व्यापक पुनर्विकास का प्रस्ताव शामिल है। पर्यटन विभाग के अनुसार यहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार, सौंदर्यीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जाना है। लेकिन वर्तमान में इस क्षेत्र में कई निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के कारण भूमि उपलब्ध कराना चुनौती बना हुआ है।

मंदिर परिसर के पास स्थित पुरानी धर्मशाला की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। ट्रस्ट का कहना है कि भवन काफी जर्जर हो चुका है और सुरक्षा की दृष्टि से इसके पुनर्विकास की आवश्यकता है। इस संबंध में भी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं।

पर्यटन विभाग का कहना है कि कॉरिडोर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, लेकिन इसके लिए भूमि संबंधी बाधाओं का समाधान आवश्यक है। जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और मंदिर ट्रस्ट के बीच समन्वय स्थापित कर विवादों का निराकरण किए जाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।

दमोह जिले की प्रमुख धार्मिक और पर्यटन विकास योजनाओं में शामिल बांदकपुर कॉरिडोर परियोजना की सफलता अब काफी हद तक भूमि विवादों के समाधान और प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर मानी जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

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