राजगढ़ः बांकपुरा जमीन विवाद-किसान महापंचायत में सत्ता-विपक्ष एकजुट, जमीन न देने का फैसला
राजगढ़, 13 मई(हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा तहसील के ग्राम बांकपुरा में 219 बीघा भूमि विवाद को लेकर बुधवार को आयोजित विशाल किसान महापंचायत में किसानों के समर्थन में सत्ता और विपक्ष दोनों ही खुलकर सामने आए।
महापंचायत में सबसे पहले प्रदेश के मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग राज्यमंत्री नारायणसिंह पंवार किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। राज्यमंत्री ने महापंचायत में कंपनी और अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसानों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
एक वायरल वीडियो में वे कहते नजर आए कि“कंपनी को नोटिस दीजिए। किसानों का जितना नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कराई जाए। जरूरत पड़ी तो पुलिस केस बनाओ। कोई बड़ा उद्योगपति आए, मुख्यमंत्री भी आ जाएं, पहले मेरा इस्तीफा लो, फिर बात करेंगे।”
उनके इस बयान के बाद किसानों में उत्साह साफ नजर आया। राज्यमंत्री पंवार के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष चंदरसिंह सौंधिया महापंचायत में पहुंचे। उन्होंने भी किसानों के हित में मजबूत समर्थन देते हुए कहा कि गांव की जमीन किसी भी निजी कंपनी को नहीं सौंपी जाएगी। सौंधिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों की जमीन छीनी गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा तथा सड़क जाम और कलेक्ट्रेट घेराव जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।
महापंचायत में 50 से अधिक गांवों से पहुंचे किसानों ने आरोप लगाया कि जिस भूमि पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं तथा जहां अनेक परिवारों के मकान बने हुए हैं, उसी जमीन का सीमांकन कर निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पर किसानों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि बांकपुरा और आसपास के गांवों की एक इंच भूमि भी किसी निजी कंपनी के हवाले नहीं की जाएगी। किसानों ने दोहराया कि यह भूमि उनकी आजीविका, अस्मिता और आने वाली पीढ़ियों का आधार है। शासन-प्रशासन से कहा गया कि कंपनियों के हित में किसानों पर किसी भी प्रकार का दबाव या उत्पीड़न न कराया जाए, अन्यथा क्षेत्र के किसान लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
महापंचायत में एसडीएम गोविंदकुमार दुबे, तहसीलदार आनंद जायसवाल सहित अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। बांकपुरा का यह विवाद अब स्थानीय मुद्दा न रहकर बड़ा राजनीतिक विषय बनता जा रहा है, जिसमें किसान एकता का सशक्त स्वर साफ सुनाई दे रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक

