राजगढ़ः 250 वर्ष पुरानी दुर्लभ आयुर्वेदिक पांडुलिपि प्रशासन को सौंपी

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राजगढ़ः 250 वर्ष पुरानी दुर्लभ आयुर्वेदिक पांडुलिपि प्रशासन को सौंपी


राजगढ़, 02 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लगभग 250 वर्ष पुरानी दुर्लभ आयुर्वेदिक पांडुलिपि मंगलवार को जिला प्रशासन को सौंपी गई है।

यह पांडुलिपि लंबे समय से जिले के एक प्राचीन केवलय योग आश्रम में सुरक्षित रखी गई थी,जिसका संरक्षण आयुर्वेदिक औषधि निर्माण से जुड़े गोकुलप्रसाद दांगी द्वारा किया जा रहा था। ब्रजभाषा में देवनागरी लिपि में लिखी गई इस पांडुलिपि में आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण, उपचार पद्धतियों तथा पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी संकलित है। आश्रम के संरक्षक गुरुजी के मार्गदर्शन में पांडुलिपि में वर्णित ज्ञान का उपयोग वर्षों से जनकल्याण और लोगों की सेवा के लिए किया जाता रहा है।

दांगी ने इस अमूल्य धरोहर को शोध एवं संरक्षण के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. गिरीशकुमार मिश्रा को सौंपा। जिला प्रशासन अब इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व का परीक्षण कराएगा तथा इसे भारत सरकार की प्राचीन विरासत संरक्षण योजनाओं से जोड़ने की दिशा में प्रयास करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पांडुलिपि के अध्ययन से क्षेत्र के इतिहास और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने नागरिकों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति, परिवार, मंदिर, आश्रम या संस्था के पास प्राचीन पांडुलिपियां, दस्तावेज, अभिलेख अथवा ऐतिहासिक रिकॉर्ड सुरक्षित हैं तो उनकी जानकारी जिला प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि ऐसी धरोहरों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक

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