झाबुआ: अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ा रावण का मेला, अप्रत्याशित रावण दहन से आक्रोशित लोगों ने जलाया सीएमओ का पुतला

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झाबुआ: अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ा रावण का मेला, अप्रत्याशित रावण दहन से आक्रोशित लोगों ने जलाया सीएमओ का पुतला


झाबुआ, 21 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिले के थांदला में दशहरा पर्व पर लगने वाला एवं जिले के बड़े मेले में शुमार चार दिवसीय विजया दशमी मवेशी मेला इस वर्ष आरंभिक काल में ही लापरवाही एवं अव्यवस्थाओं का शिकार हो गया।

एक तरफ जहां परंपरागत रूप से भगवान् श्री राम के प्रतीक के रूप में पहुंचे राम रथ के वहां पहुंचने के पहले ही रावण के पुतले का दहन हो गया, वहीं दूसरी तरफ मेले में अव्यवस्थाए इस कदर हावी रही कि दूर क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं और दुकानदारों को पीने के लिए बमुश्किल पानी मिला। जबकि संपूर्ण मेला क्षेत्र कचरे से पटा हुआ नजर आया। अप्रत्याशित रूप से समय पूर्व हुए हुए रावण दहन के बाद बड़ी संख्या में दशहरा मैदान पहुंचे आक्रोशित लोगों ने नगर परिषद सीएमओ और मेला समिति के विरुद्ध आक्रोश जाहिर कर नारेबाजी करते हुए सीएमओ का ही पुतला दहन कर दिया।

स्थानीय नगर परिषद द्वारा आयोजित किया जा रहा यह मेला 19 अक्टूबर से शुरू हुआ और 22 अक्टूबर तक जारी रहेगा ।

विजया दशमी पर श्रीराम मंदिर से निकलने वाली रथ यात्रा की व्यवस्था में करीब तीन दशक से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता एवं जिला कांग्रेस के महामंत्री राजेश जैन ने इस घटनाक्रम से व्यथित होते हुए कहा कि स्थानीय नगर परिषद की अकर्मण्यता और लापरवाही के चलते भगवान् श्री राम के प्रतीक के रूप में दशहरा मैदान पहुंचने वाले राम रथ के वहां पहुंचने के पूर्व ही रावण के पुतले का दहन हो गया, परिणामस्वरूप लोगों में निराशा फैल गई, और अप्रत्याशित रूप से रावण दहन के बाद दूरदराज इलाकों से हजारों की संख्या में दशहरा मैदान पहुंचे श्रद्धालुओं को बड़ी निराशा हाथ लगी, और वे रावण दहन देखें बगैर ही वापस अपने घरों की ओर लौट गए, जबकि इस घटनाक्रम से आक्रोशित लोगों के एक वर्ग ने नगर परिषद थांदला के सीएमओ के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए स्थानीय अस्पताल चौराहे पर सीएमओ का ही पुतला दहन कर दिया।

उल्लेखनीय है कि जिले के अनुविभागीय मुख्यालय थांदला में परंपरागत रूप से भरने वाला विजया दशमी मवेशी मेला जिसे जनजातीय समुदाय में रावण का मेला कहा जाता है, उक्त मेला जिले में विभिन्न अवसरों पर लगने वाले मेलों में एक बड़े मेले के रूप में गिना जाता रहा है। उक्त दशहरा मेला महज एक कार्यक्रम न होकर दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हजारों हजार लोगों की आस्था और परंपरा से जुड़ा आयोजन और भगवान् श्री राम के प्रति अपनी श्रद्धा की अभिव्यक्ति का एक माध्यम रहा है, वहीं यह अपने निज जनों से मेल मिलाप का एक व्यापक स्थल की भूमिका का भी निर्वाह करता रहा है, किंतु इस बार प्रशासनिक लापरवाही एवं अकर्मण्यता ने जन आस्था को नैस्त नाबूद कर दिया है, क्यौकि बड़ी संख्या में वहां जुटने वाले श्रद्धालुओं द्वारा जिन शानदार क्षणों का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा था, वे क्षण आने से पहले ही पूरा आयोजन अप्रत्याशित रूप से परिवर्तित हुआ देखा गया, तब बड़ी संख्या में दूरदराज क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं को गहन निराशा हाथ लगी और उन्हैं बगैर रावण दहन देखें ही वापस लौट जाना पड़ा।

अकस्मात रावण दहन से आक्रोशित लोगों ने नगर परिषद प्रशासन की निंदा करते हुए परिषद की अकर्मण्यता पूर्ण कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए, किंतु वहां नगर परिषद का कोई भी जिम्मेदार मौजूद नहीं था। मिली जानकारी अनुसार मंगलवार रात जब उक्त वाक्या घटित हुआ तब नगर परिषद सीएमओ के साथ मेला समिति के पदाधिकारी एवं अन्य जवाबदार लोग नदारद पाए गए। बाद में आक्रोशित लोगों ने अस्पताल चौराहे पर सीएमओ के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए सीएमओ का पुतला दहन किया।

जिला कांग्रेस के महामंत्री एवं धार्मिक, सामाजिक कार्यकर्ता राजेश जैन ने बुधवार को हिंदुस्थान समाचार को कहा कि उनके द्वारा संपूर्ण घटनाक्रम के लिए नगर परिषद सीएमओ को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें तत्काल निलंबित किए जाने की मांग जिला प्रशासन से की है।

विजया दशमी मवेशी मेला में अप्रत्याशित रूप से रावण दहन के घटनाक्रम के साथ ही एक तरफ जहां मेला जल्द बिखरने लगा वहीं दूसरी तरफ़ मेला क्षेत्र में अव्यवस्थाए भी हावी रही।

दशहरा मेला में करीब रूपे 30,000 का बड़ा प्लाट किराए पर लेकर

स्टेशनरी की दुकान लगाने हेतु उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से आए व्यापारी शिवराज जायसवाल ने बुधवार को मेला स्थल पर कहा कि रावण दहन जल्दी होने और उससे उपजी अव्यवस्था से लोग मेला किए बगैर ही लौट गए, इसलिए धंधा नहीं चला, और हमें बड़ा नुक़सान हुआ। शिवराज जायसवाल ने हिंदुस्थान समाचार को कहा कि ठेकेदार से प्लाट लिया, जो करीब तीस हजार के आसपास पड़ा, जबकि धंधा नहीं हो पाया है, ऐसे में आगे से अब यहां नहीं आएंगे।

मेले में कटलरी का सामना बेचने गुजरात से आए छोटे दुकानदार मोहम्मद जाकिर ने कहा कि एक ठैलागाड़ी लगाने जितनी जगह एक हजार हजार में ली, किंतु अव्यवस्था इतनी है कि पीने का पानी भी बड़ी मुश्किल से मिल रहा है, और धंधा नहीं के बराबर है, । नगर परिषद पर आक्रोशित होते हुए दुकानदार ने कहा कि प्लाट किराए के लिए उसपर दबाव बनाया जा रहा है, किंतु उसकी कुछ दुकिनदारी ही नहीं चली तो वह कहां से रुपए भरेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

Livevns.news Desk
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