अनूपपुर: नगर पालिका से 100 मीटर दूर सरकारी स्कूल में 7 छात्र के बीच पहुंच रहा सिर्फ एक
अनूपपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने, नामांकन बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के दावों के बीच नगर पालिका पसान के वार्ड क्रमांक-8 स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय पसान की स्थिति इन दावों की वास्तविकता उजागर कर रही है। वर्ष 1966 से संचालित इस विद्यालय में वर्तमान में नामावली में केवल सात छात्र दर्ज हैं, लेकिन पिछले एक सप्ताह से नियमित रूप से केवल एक छात्र, अंश कुमार, ही विद्यालय पहुंच रहा है।
विद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार कक्षा-2 में कृष्ण पनिका, कक्षा-3 में प्रिंस बैगा और अमर बैगा, कक्षा-4 में करण बैगा और सृष्टि पनिका तथा कक्षा-5 में बृजेश बैगा अध्ययनरत हैं। वहीं कक्षा-1 में एक नए छात्र का प्रवेश हुआ है, लेकिन प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उसका नाम दर्ज नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार, एक समय इस विद्यालय में छात्र संख्या काफी अधिक थी, लेकिन क्षेत्र में निजी विद्यालयों की संख्या बढ़ने और आसपास अन्य सरकारी स्कूल खुलने के कारण यहां लगातार नामांकन घटता गया। वर्तमान में विद्यालय में केवल एक शिक्षक पदस्थ हैं। दूसरे शिक्षक का तीन वर्ष पहले स्थानांतरण हो गया था और वे अटैचमेंट पर ही कार्यरत हैं, जिससे विद्यालय का संचालन प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है।
चिंता की बात यह भी है कि बच्चों की लगातार अनुपस्थिति के बावजूद अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें विद्यालय भेजने के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। नगर पालिका कार्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित इस विद्यालय की यह स्थिति शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
निजी खर्च से बन रहा मध्यान्ह भोजन
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक उमाशंकर यादव ने बताया कि अधिकांश बच्चे इन दिनों अपने परिवार के साथ धान की रोपाई के कार्य में व्यस्त हैं, इसलिए विद्यालय नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से मध्यान्ह भोजन की राशि प्राप्त नहीं हुई है, जिसके चलते वे अपने निजी खर्च से बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। विद्यालय में एक रसोइया पदस्थ है, जो एक छात्र के लिए भी भोजन तैयार करती है।
विभागीय निर्देश भी नहीं आए काम
6 जुलाई 2026 को तत्कालीन कलेक्टर हर्षल पंचोली ने समय-सीमा पत्रों एवं विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में शिक्षा विभाग को कक्षा 1 से 8 तक शेष बच्चों का नामांकन एक सप्ताह के भीतर अभियान चलाकर शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए थे। समीक्षा बैठक में बताया गया था कि जिले में 94.3 प्रतिशत बच्चों का नामांकन हो चुका है। कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों के विद्यालयों में प्रवेश को प्राथमिकता देने, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग के समन्वय से विशेष प्रयास करने और निःशुल्क पुस्तक एवं साइकिल वितरण के लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे।
हालांकि, शासकीय प्राथमिक विद्यालय पसान की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। लगातार घटती छात्र संख्या, विद्यार्थियों की अनुपस्थिति और संसाधनों की कमी शिक्षा व्यवस्था के समक्ष गंभीर चुनौती बनी हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

