अशोकनगर: सलाखों के पीछे आस्था का उजाला, जेल में बंदियों ने गढ़ी मां की प्रतिमा, अनूठे उत्सव की धूम

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अशोकनगर: सलाखों के पीछे आस्था का उजाला, जेल में बंदियों ने गढ़ी मां की प्रतिमा, अनूठे उत्सव की धूम


अशोकनगर: सलाखों के पीछे आस्था का उजाला, जेल में बंदियों ने गढ़ी मां की प्रतिमा, अनूठे उत्सव की धूम


अशोकनगर: सलाखों के पीछे आस्था का उजाला, जेल में बंदियों ने गढ़ी मां की प्रतिमा, अनूठे उत्सव की धूम


अशोकनगर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। नवरात्रि पर्व के अवसर पर शहर से लेकर गांवों तक मां दुर्गा की आराधना की धूम है। वहीं इस बीच मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिला जेल में मनाया जा रहा दुर्गा उत्सव अपने अनूठे अंदाज के कारण चर्चा में है। यहां बंदियों ने मां दुर्गा की प्रतिमा स्वयं तैयार कर अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मकता का परिचय दिया है। जेल की चारदीवारी के भीतर बंदियों द्वारा अपने हाथों से प्रतिमा निर्माण करना इस आयोजन को खास बना रहा है।

जेल परिसर में दुर्गा उत्सव की तैयारियां जेल प्रबंधन और बंदियों द्वारा पहले से ही की गई थीं। बंदियों ने मिट्टी को आकार देकर मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की। इसके बाद प्रतिमा को सजाने-संवारने में भी अपनी भागीदारी निभाई। इस पूरी प्रक्रिया में बंदियों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने का अवसर मिला।

पूजा-अर्चना और व्रत में भी भागीदारी:नवरात्रि के दौरान जेल परिसर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। बंदी पूजा-अर्चना, आरती और देवी आराधना में भाग ले रहे हैं। कुछ बंदियों ने नौ दिनों का व्रत भी रखा है। व्रत रखने वाले बंदियों के फलाहार और खानपान की व्यवस्था जेल प्रशासन द्वारा की गई है। पूरे आयोजन में बंदियों की भागीदारी से जेल परिसर में उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा है।

सुधार की दिशा में रचनात्मक पहल:जेल अधीक्षक ललित दीक्षित के अनुसार, इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य बंदियों को धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों से जोडऩा है। ऐसे अवसर बंदियों को अपनी प्रतिभा निखारने, सामूहिक गतिविधियों में भाग लेने और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

जेल में आयोजित दुर्गा उत्सव यह संदेश भी देता है कि कानून के तहत सजा भुगतने के साथ बंदियों के जीवन में सुधार और सकारात्मक बदलाव की संभावनाओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

आस्था के साथ नई शुरुआत की उम्मीद:यहां जेल में बंदियों द्वारा स्वयं मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करना केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी रचनात्मक क्षमता को सामने लाने का अवसर भी है। यह पहल इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करती है कि उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से बंदियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार

Livevns.news Desk
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