अशोकनगर: नवनिर्मित तहसील भवन लोकार्पण में नहीं बुलाने पर भडक़े वकील

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अशोकनगर: नवनिर्मित तहसील भवन लोकार्पण में नहीं बुलाने पर भडक़े वकील


अशोकनगर: नवनिर्मित तहसील भवन लोकार्पण में नहीं बुलाने पर भडक़े वकील


अशोकनगर,06 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर में प्रशासनिक कार्यशैली और विवादों का चोली-दामन का साथ होता जा रहा है। सोमवार को तहसील परिसर उस समय जंग का मैदान बन गया, जब सैकड़ों वकीलों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र नारेबाजी की। वकीलों का गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने कलेक्टर मुर्दाबाद के नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

क्यों भडक़ा वकीलों का गुस्सा?विवाद की जड़ शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा किया गया नवनिर्मित तहसील भवन का लोकार्पण है। अभिभाषक संघ का आरोप है कि कार्यक्रम में अभिभाषक संघ के अध्यक्ष, सचिव या किसी भी सदस्य को आमंत्रित करना तो दूर, सूचना तक नहीं दी गई। आरोप लगाते हुए कहा कि करोड़ों की लागत से बने नए भवन में न तो वकीलों के बैठने का स्थान तय है और न ही टाइपिस्टों के लिए कोई जगह छोड़ी गई है।

सम्मान को ठेस अभिभाषक संघ के अध्यक्ष चन्द्रशेखर साहू ने दोटूक कहा, न्याय व्यवस्था की दो धुरियां होती हैं—प्रशासन और वकील। वकीलों के बिना न्याय अधूरा है, यह अपमान बर्दाश्त के बाहर है। बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि मंगलवार को थमेगा कामकाज यह विरोध केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं रहने वाला है। अभिभाषक संघ ने ऐलान किया है कि मंगलवार को जिले के 400 वकील लामबंद होकर बड़ा प्रदर्शन करेंगे और अपनी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाएंगे।

प्रशासन की यह चुप्पीजब इस गंभीर मामले और वकीलों के आक्रोश को लेकर एसडीएम शुभ्रता त्रिपाठी से प्रतिक्रिया लेनी चाही, तो उन्होंने टालमटोल वाला रवैया अपनाया। उन्होंने केवल इतना कहा, अभी मीटिंग में हूं, बाद में बात करती हूं।

विवादों की हैट्रिक: सिंधिया के दौरे पर खड़े हुए तीन बड़े सवालप्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि सिंधिया के 5 दिवसीय दौरे में यह तीसरा बड़ा विवाद है

पहला विवाद: मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा पूर्व में लोकार्पित हो चुके कार्यों का सिंधिया से पुन: लोकार्पण कराना।

दूसरा विवाद: शिलालेख पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन। जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप का नाम पूर्व विधायक के नीचे लिखना।

तीसरा विवाद: तहसील भवन लोकार्पण में वकीलों की पूरी तरह अनदेखी और बैठने की व्यवस्था न होना।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार

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