अशोकनगर: नगरपालिका में महाघोटाले के आरोप,प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनी नपा: नेता प्रतिपक्ष

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अशोकनगर: नगरपालिका में महाघोटाले के आरोप,प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनी नपा: नेता प्रतिपक्ष


अशोकनगर,10 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश में अशोकनगर नगरपालिका में महाघोटाला किया गया है, यहां नगरपालिका कोई निकाय न होकर प्राइवेट लि.कम्पनी की तरह कार्य कर रही है। इस तरह के आरोप नगरपालिका में नेता प्रतिपक्ष रीतेश जैन आजाद के द्वारा बुधवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान लगाए गए।

रीतेश आजाद ने आरोप लगाते हुए कहा है कि यहां नगरपालिका अध्यक्ष और अपात्र सीएमओ सभी आदेशों को ठेंगा दिखा कर सिंगल टेंडर पर लाखों-करोड़ों की बंदरबांट कर रहे हैं। नगर पालिका इस समय भ्रष्टाचार,भाई-भतीजावाद और भारी वित्तीय अनियमितताओं का मुख्य केंद्र बन चुकी है। हालात ये हैं कि नगर पालिका अध्यक्ष और अपात्र प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने मिलकर इस सरकारी संस्था को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाना शुरू कर दिया है।

सिंगल टेंडर का खेल, विज्ञापन गायब, नोटिस बोर्ड सूना:

रीतेश आजाद ने आरोप लगाते हुए कहा कि नियमों के मुताबिक किसी भी टेंडर को वैध मानने के लिए न्यूनतम तीन निविदाएं आना अनिवार्य है। साथ ही बड़े टेंडर को एक राष्ट्रीय और दो प्रादेशिक अखबारों में प्रकाशित करना और नगर पालिका के नोटिस बोर्ड पर लगाना अनिवार्य है ताकि पारदर्शिता बनी रहे, लेकिन यहां पक्षपात इतना अधिक कि न तो टेंडर अखबारों में दिखते हैं और न ही नोटिस बोर्ड पर। चुनिंदा चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मात्र एक (सिंगल) निविदा आने पर ही टेंडर खोलकर काम थमा दिए जा रहे हैं।

अजीबो-गरीब कारनामा, टेंडर बाद में खुलेगा, काम पहले ही पूरा!

यहां देखने में आ रहा है कि टेंडर खुलने की तारीख बाद की होती है, लेकिन ठेकेदार काम पहले ही निपटा चुके होते हैं। बाद में टेंडर प्रक्रिया जारी होती है।

केस 1: (विसर्जन कुंड पेंटिंग) 5 लाख की पेंटिंग का टेंडर 20 मई को खुलना था, लेकिन 11 मई को जब विसर्जन कुंड का उद्धाटन हुआ, तो वहां पेंटिंग का काम पहले ही हो चुका था। इसमें भी सिंगल निविदा पर काम आवंटित कर दिया गया।

केस 2: (स्वच्छ सर्वेक्षण पेंटिंग) करीब 10 लाख का टेंडर 25 मई को खुलना था, मगर 15 मई से पहले ही काम पूरा हो गया। इसकी फाइनेंशियल वैल्यूएशन क्या है, इसका कोई अता-पता नहीं है।

केस 3: (विमानों का चबूतरा) सुविधा घाट निर्माण के लिए 12.18 लाख का टेंडर 1 जून को खुलना था, लेकिन मई के महीने में ही निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया।

केस 4: (संजय स्टेडियम का बिना टेंडर भूमिपूजन) हाल ही में जोर-शोर से प्रचार किया गया कि संजय स्टेडियम में 2 करोड़ से निर्माण कार्य होगा। 5 जून को अध्यक्ष ने स्वयं कंप्यूटर लेवलिंग के साथ इसका शुभारंभ भी कर दिया, लेकिन जब जागरूक नागरिकों ने एमपी टेंडर साइट खंगाली, तो पता चला कि इस कार्य का अभी तक कोई टेंडर ही जारी नहीं हुआ है! बिना टेंडर के करोड़ों का काम शुरू करना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार

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