केंद्रीय विद्यालय चंदेरी में छात्र को मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप, बाल अधिकार आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट

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केंद्रीय विद्यालय चंदेरी में छात्र को मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप, बाल अधिकार आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट


केंद्रीय विद्यालय चंदेरी में छात्र को मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप, बाल अधिकार आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट


केंद्रीय विद्यालय चंदेरी में छात्र को मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप, बाल अधिकार आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट


चंदेरी, 9 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में कक्षा आठ के छात्र को कथित रूप से मानसिक प्रताड़ना दिए जाने का मामला मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर अशोकनगर को निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने तथा सात दिन के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामला विद्यालय परिसर से शिक्षिका का मोबाइल गुम होने और इसके बाद छात्र पर संदेह जताए जाने से जुड़ा है।

शिकायतकर्ता अभिभावक आशीष शर्मा के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को विद्यालय परिसर में एक शिक्षिका का मोबाइल फोन गुम हो गया था। आरोप है कि इसके बाद कक्षा आठ में पढ़ने वाले उनके पुत्र शुभ शर्मा पर मोबाइल चोरी करने का संदेह जताया गया। मामले में पुलिस को शिकायत या सूचना दिए जाने के बाद छात्र से पूछताछ भी की गई।

अभिभावक की शिकायत के मुताबिक, बाद में गुम हुआ मोबाइल विद्यालय की कक्षा चार में मिला था। शिकायत में इसी तथ्य के आधार पर छात्र पर संदेह जताए जाने और उसके बाद हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। आयोग के पत्र में भी मोबाइल कक्षा चार में मिलने के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए छात्र पर लगाए गए आरोपों के संबंध में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।

अभिभावक ने विद्यालय की प्राचार्य रुचि वर्मा और संबंधित शिक्षिका के विरुद्ध छात्र को मानसिक रूप से परेशान करने सहित अन्य आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि घटना के बाद बच्चा मानसिक रूप से व्यथित हो गया था। इसी कारण उन्होंने तीन और चार अगस्त को उसे विद्यालय नहीं भेजा।

अभिभावक ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में शिकायत करने के बाद छात्र के साथ कथित तौर पर अलग व्यवहार किया गया और उसे आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और छात्र के अधिकारों तथा सुरक्षा का ध्यान रखने की मांग की है, हालांकि, छात्र को मानसिक प्रताड़ना देने और उसके साथ अनुचित व्यवहार किए जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में संबंधित विद्यालय प्रबंधन और शिक्षिका का पक्ष सामने आने पर घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

आयोग ने सात दिन में रिपोर्ट मांगी

मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 13(1) के अंतर्गत प्रकरण का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर अशोकनगर को जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर सात दिन के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा है।

अब जिला प्रशासन की जांच में मोबाइल गुम होने की घटना, छात्र पर संदेह जताने के आधार और मोबाइल मिलने के बाद विद्यालय स्तर पर की गई कार्रवाई की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही छात्र के साथ कथित व्यवहार, संबंधित शिकायतों, विद्यालय के अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।

जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजरें

स्कूली छात्र के अधिकारों और उसकी शिक्षा से जुड़े इस मामले में आयोग के निर्देश के बाद जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अभिभावक ने वरिष्ठ स्तर पर निगरानी रखते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। संबंधित पक्षों की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगा। अब निगाहें कलेक्टर अशोकनगर द्वारा कराई जाने वाली जांच और आयोग को भेजे जाने वाले कार्रवाई प्रतिवेदन पर टिकी हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / Nirmal Kumar Vishwkarma

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