चंबल में अवैध रेत खनन रोकने के लिए एआई टॉवर और 16 वन चौकियां तैयार
सर्वोच्च न्यायालय
के निर्देशों के पालन की समीक्षा, 4 नवंबर को अदालत में पेश होगी रिपोर्ट
मुरैना, 27 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में रेत के अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है। अभयारण्य क्षेत्र में एआई टॉवर स्थापित करने के साथ नदी के विभिन्न घाटों से गांवों की ओर आने वाले 16 मार्गों पर स्थायी वन चौकियां बनाई गई हैं। वन विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की गई है। इसके अलावा चंबल से शहर के प्रमुख क्षेत्रों तक आने वाले मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है।
सर्वोच्च न्यायालय
के निर्देशों के पालन की समीक्षा के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) के सदस्य सुनील लिमये ने प्रशासन, पुलिस, वन, खनिज, परिवहन और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के चंबल नदी के तटवर्ती जिलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। करीब तीन घंटे चली बैठक में अवैध खनन और परिवहन रोकने के लिए किए गए उपायों तथा आगामी योजनाओं की जानकारी दी गई। बैठक के बाद सीईसी सदस्य ने नदी के तटवर्ती क्षेत्र का भ्रमण भी किया।
4 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय
में पेश होगी रिपोर्ट
सर्वोच्च न्यायालय
ने स्वतः संज्ञान लेकर चंबल नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में रेत के अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए गठित सीईसी के सदस्य ने अधिकारियों से अब तक की कार्रवाई और प्रस्तावित व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
सीईसी सदस्य इन उपायों और योजनाओं पर अपना प्रतिवेदन समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद 4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में चंबल नदी में अवैध रेत खनन और परिवहन रोकने के लिए किए गए प्रयासों तथा आगामी योजनाओं की जानकारी पेश की जाएगी।
निर्माण कार्यों के लिए वैकल्पिक रेत का भंडारण
चंबल नदी की रेत पर निर्भरता कम करने और शासकीय एवं निजी निर्माण कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से मुरैना मुख्यालय में रेत का भंडारण किया गया है। जिला प्रशासन के अनुसार, एम-सैंड और सिंध नदी की वैध रेत खदानों से लाई गई करीब आठ लाख घनमीटर रेत का भंडारण निजी फर्मों ने प्रशासन से प्राप्त लाइसेंस के आधार पर किया है।
मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने बताया कि चंबल की रेत के विकल्प के रूप में 40 एम-सैंड इकाइयों तथा 18 स्थानों पर सिंध नदी की रेत के भंडारण की व्यवस्था की गई है। सेंचुरी, परिवहन और खनिज विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी समिति के समक्ष रखा गया है।
70 गांवों की भूमि वन विभाग के लिए अधिसूचित करने का प्रस्ताव
बैठक में राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के तटवर्ती 70 गांवों की करीब 12,800 हेक्टेयर भूमि को वन विभाग के लिए अधिसूचित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। मध्यप्रदेश सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद वन अधिनियम के तहत इस संबंध में घोषणा की जा सकती है।
प्रशासन के अनुसार, सीईसी सदस्य अवैध खनन और परिवहन रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा प्रस्तावित योजनाओं से संतुष्ट दिखाई दिए।
जमीन पर हो रहा निर्देशों का पालन: पुलिस
भिण्ड के पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय
के निर्देशों के पालन के लिए जमीनी स्तर पर काम किया जा रहा है। इन प्रयासों की समीक्षा के लिए सीईसी सदस्य क्षेत्र के भ्रमण पर आए हैं। उन्हें अवैध रेत खनन रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी गई है। सीईसी सदस्य नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी कर सकते हैं।
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि तीनों राज्यों के अधिकारियों ने रेत खनन रोकने के लिए किए जा रहे कार्यों और गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही नई योजनाओं के सुझाव भी प्रस्तुत किए गए। उनके अनुसार, सीईसी सदस्य अभयारण्य में किए जा रहे कार्यों से संतुष्ट दिखाई दिए।
हिन्दुस्थान समाचार/उपेंद्र
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

