एडवोकेट अनिल मिश्रा कोर्ट में पेश, डॉ. अंबेडकर चित्र जलाने के आरोप में सात पर एफआईआर, चार गिरफ्तार
भोपाल, 02 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक संवेदनशील और विवादित मामले ने कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और उनके खिलाफ अपमानजनक नारे लगाने के आरोप में सीनियर एडवोकेट अनिल मिश्रा को शुक्रवार को क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में पेश किया। इस मामले में अनिल मिश्रा समेत कुल सात लोगों के खिलाफ साइबर सेल थाने में एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस के मुताबिक यह पूरा मामला हाल ही में सामने आए एक वीडियो और कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार किया गया। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला तूल पकड़ने लगा और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। डॉ. अंबेडकर देश के संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक माने जाते हैं, ऐसे में उनके चित्र का अपमान होने के आरोप ने समाज में आक्रोश पैदा कर दिया।
शिकायत मिलने के बाद ग्वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू की। जांच के आधार पर साइबर सेल थाने में अनिल मिश्रा सहित सात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को भी खंगाला जा रहा है।
बताया जा रहा है कि एडवोकेट अनिल मिश्रा गुरुवार रात मुरैना में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद शुक्रवार को उन्हें ग्वालियर की अदालत में पेश किया गया। कोर्ट में पेशी के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। अदालत परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।
कोर्ट में पेशी के समय अनिल मिश्रा के समर्थक भी बड़ी संख्या में पहुंचे और नारेबाजी करते नजर आए। समर्थकों की भीड़ को देखते हुए पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थी। हालांकि, पुलिस की सतर्कता के चलते कोई बड़ा विवाद या टकराव नहीं हुआ। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
गौरतलब है कि अनिल मिश्रा ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और उन्हें एक सीनियर एडवोकेट के तौर पर जाना जाता है। इससे पहले भी उनके खिलाफ भड़काऊ बयान देने के आरोप में क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। ऐसे में एक वरिष्ठ वकील पर इस तरह के आरोप लगना पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना देता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है। कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। वहीं, इस घटना के बाद ग्वालियर सहित आसपास के इलाकों में पुलिस सतर्क है और किसी भी तरह की अफवाह या तनाव को रोकने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

